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नवरात्रि में जानें किस तारिख को किस देवी की होगी पूजा और नौ रंग और इस पर्व का महत्व और अक्टूबर 2021 के साथ नवरात्रि 2021 के रंग |

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हिन्दुओ का एक बहुत ही पवित्र त्यौहार नवरात्री, ये नौ रातो का पर्व है यानि हमारी माता रानी के नौ रूपों का   इस पर्व पर पूजन किया जाता है।  नवरात्री शब्द संस्कृत से लिया गया है और दसवें दिन दशहरा मनाने की प्रथा है। ये पर्व साल में चार बार पौष, चैत्र, आषाढ,अश्विन महीने में आता है। यह मुख्य त्यौहार पुरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है।  आइये जानते है नवरात्री में नौ देवी के रूपों के नाम और उस दिन से जुड़े रंग और इस त्यौहार कि शुरुआत :- 7 अक्टूबर - प्रतिपदा- मां शैलपुत्री - पीला 8 अक्टूबर - द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी ,  हरा 9 अक्टूबर - तृतीया-  मां चंद्रघंटा  - भूरा  और चतुर्थी  मां कुष्मांडा  -  नारंगी 10 अक्टूबर --पंचमी  मां स्कंदमाता  - सफेद 11 अक्टूबर - षष्ठी-  मां कात्यायनी   -  लाल 12 अक्टूबर - सप्तमी -  मां कालरात्रि   -  नीला 13 अक्टूबर - अष्टमी-  मां महागौरी दुर्गा  -  गुलाबी 14 अक्टूबर - - नवमी  मां सिद्धिदात्री  -  बैंगनी 15...

पितृ पक्ष की जानकारी और महत्व ।

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पितृ पक्ष :-  पितृ पक्ष जिसको सब श्राद्ध के नाम से जानते हैं उसे कनागत भी कहा जाता हैं। पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू ये श्राद्ध पन्द्रह दिनो यानि अमावस्या के दिन समाप्त हो जाते हैं।  ऐसा कहा जाता हैं। कि श्राद्ध के समय, पूर्वज अपने रिश्तेदारों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं और श्राद्ध के समय हिन्दू जो भोजन बनाते हैं। सबसे पहले उस भोजन को प्रसाद के रूप में पूर्वजों को श्रद्धांजलि और सम्मान से अर्पित करते हैं। महाकाव्य यानी रामायण और महाभारत मे श्राद्ध कर्म की व्यख्या देखने को मिल जाएगी ! श्राद्ध किसे कहते हैं? श्राद्ध का अर्थ है। जो पूर्वज इस समय जीवित नहीं है। यानि जो परिजन (पूर्वज) अपना शरीर छोड़ गये हैं। उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए उन्हें तर्पण देकर उनको सम्मान पूर्वक आभार देना ! पितृ पक्ष का महत्‍व 15 दिन के ये पितृ पक्ष बहुत ही महत्‍व रखते हैं। पितर तब प्रसन्‍न होते हैं। जब उनका श्राद्ध किया जाता हैं इसलिए पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करना, इन दिनों में पूजा व पिंडदान करना जरूरी माना जाता है। यद्यपि श्राद्ध ना किये जाये तो पूर्वज नाराज तो होते ही हैं। स...

पितर कौन है, कैसे करें श्राद्ध, श्राद्ध की महत्वपूर्ण तारीखें और पितर के शुभ संकेत की जानकारी ।

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पितर कौन कहलाते हैं ? ऐसे व्यक्ति जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उनमे चाहे विवाहित हों या अविवाहित, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष….वो पितर कहलाते हैं। भाद्रपद महीने के पितृ पक्ष को उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण दिया जाता हैं। पितृपक्ष में श्राद्ध कैसे करे? श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए बनाए गए भोजन में से एक हिस्सा गाय, दूसरा हिस्सा कुत्ते, तीसरा हिस्सा कौए और एक हिस्सा अतिथि के लिए रखे ! फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। श्राद्ध की महत्वपूर्ण तारीखें पंचम श्राद्ध - जिन लोगों यानी पितरो की मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, पंचमी तिथि पर हुई हो ऐसे में उन लोगो का श्राद्ध पंचमी तिथि में किया जाता हैं ! नवमी श्राद्ध :- सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध इसी नवमी श्राद्ध में किया जाता हैं। इस तिथि को मातृनवमी के नाम से भी जाना जाता हैं। चतुर्दशी श्राद्ध :- जिन पितरो की अकाल मृत्यु हो जाती हैं। उनका श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता हैं। सर्वपितृ अमावस्या :- जिन पितरो के मृत्यु की पूर्ण जानकारी ना हो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या यानि श्राद्ध के अंतिम दिन अमावस्या को किया जाता है। ऐसे मिलते...

ABOUT GANESHA FACTS । गणेशजी से जुड़े रोचक तथ्य ।

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1.) गणेश जी को मोदक ओर लाल व सिंदूरी रंग बहुत प्रिय है।  1.) Ganesh ji loves modak and red and vermilion color. 2.) गणेश जी को लिखने में विशेषज्ञता हासिल है। 2.) Ganesh ji has expertise in writing. 3.) गणेश जी का दूर्वा के प्रति विशेष लगाव है। 3.) Ganesh ji has a special attachment to Durva. 4.) निर्विघ्न कार्य गणेश जी के प्रथम स्मरण से ही संपन्न हो जाते हैं। 4.) The smooth work gets done with the first remembrance of Ganesha. 5.) गणेश जी का चिन्ह स्वस्तिक हैं। 5.) The symbol of Ganesh ji is Swastika. 6.) गणेश जी को दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना पसंद नहीं है।  6.) Ganesh ji does not like to face towards south direction. 7.) गणेश जी का वाहन मूषक हैं। 7.) Ganesha's vehicle is a mouse. 8.) सिंदूर व शुद्ध घी की मालिश गणेश जी को प्रसन्न करती हैं। 8.) Massage of vermilion and pure ghee It pleases Ganesha. 9.) गणेश जी मनोकामना को शीघ्र पूर्ण करने वाले हैं। 9.) Ganesh ji is going to complete the wish soon. 10.) कुण्डलिनी योग के अनुसार, सात कुण्डलिनी चक्रों में से ...

गणेश जी और उनके उत्सव (गणेश चतुर्थी) का इतिहास ।

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शिव पुराण में गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। गणेश जी शिवजी और पार्वती माता के पुत्र हैं ओर सर्वप्रथम पूजनीय हैं। इनका हिन्दू धर्म में सर्वोपरि स्थान है। श्री गणेश जी विघ्न विनायक होने के साथ-साथ गणों के स्वामी, एकदन्त और चतुर्बाहु भी माने जाते हैं। इनकी पूजा-अर्चना सभी जगह सर्वप्रथम की जाती है। उनका वाहन मूषक हैं। वे संसार के साधनों के स्वामी भी माने जाते हैं। गणेश जी के हाथी जैसे सिर होने के बहुत सी कथाएँ प्रचलित हैं। इसलिए इन्हें गजानन भी कहा जाता हैं। गणेश जी हिन्दुओं के आराध्य देव भी कहलाते हैं। धार्मिक उत्सव हो या फिर वैवाहिक कार्यक्रम या फिर मन्दिरों मे पूजन हर जगह शुरुआत गणपति पूजन से से ही की जाती है।  भगवन गणेश का इतिहास  – Ganesh Bhagwan History (Part-1) शंकर जी ने ही सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा का प्रावधान शुरु किया। ये पर्व दसवें दिन अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता हैं। ओर गणेश विसर्जन दस दिन में कर देना चाहिए। ये त्योहार पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हैं। भगवन गणेश जी की बहुत एतिहासिक कथाएँ प्रचलित हैं। जो आप कथाओ...

भगवान श्री कृष्ण के रोचक तथ्य | (UNKNOWN FACTS ABOUT LORD KRISHNA) |

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1.) श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान थे । उनका जन्म रोहिणी नक्षत्र मे हुआ था । 1.) Shri Krishna was the eighth child of Devaki and Vasudeva. He was born in the constellation Rohini. 2.) भगवान् श्री कृष्ण कभी भी द्वारिका में 6 महीने से अधिक नहीं रहे। 2.) Lord Shri Krishna never lived in Dwarka for more than 6 months. 3.) उज्जैन के संदीपनी आश्रम में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी औपचारिक शिक्षा मात्र कुछ महीनों में पूरी कर ली थी। 3.) In Sandipani Ashram of Ujjain, Lord Shri Krishna completed his formal education in just few months. 4.) भगवान श्री कृष्ण ने देवकी-वासुदेव की मुलाकात उनके सात मृत बच्चों से करवाई थी जो एक शाप मे जिंदगी व्यतीत कर रहे थे ये बच्चे हिरणकश्यप के पोते थे । 4.) Lord Shri Krishna had met Devaki-Vasudev with his seven dead children who were living in a curse, these children were the grandchildren of Hiranyakashyap. 5.) श्री कृष्ण ने अपने गुरु संदीपनि को दक्षिणा के रूप मे उनके मरे हुए बेटे को दे दिया था । 5.) Shri Krishna gave his Guru Sandipani as Dakshina to his ...

वृंदावन के रोचक तथय इन हिंदी (INTERESTING FACTS OF VRANDAVAN IN ENGLISH)

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वृंदावन के रोचक तथय इन हिंदी 1.) वृंदावन यमुना नदी से तीनो और से घिरा हुआ है | और यहाँ का प्राकृतिक दर्शय बहुत ही आकर्षक है | 2.) यहाँ हज़ारो छोटे-बड़े मंदिर स्थित है । 3.) यहाँ सैंकड़ों आश्रम, कई गौशालाएं है । और यहाँ अनेक ऐतिहासिक धरोहर भी है जिसे देखने के लिए हर साल भारी भीड़ एकजुट होती है | 4.) वृंदावन मे बहुत बड़ी संख्या मे विधवाएं भी रहती है वृंदावन को विधवाओं के शेहेअर के रूप मे भी जाना जाता है यहाँ इनके लिए बहुत से आश्रम भी है । 5.) यहाँ चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, सूरदास, स्वामी हरिदास कई ऐसे ऐतिहासिक नाम है जी वृंदावन से हमेशा के लिए जुड़ गए । ये नाम आज भी विश्वभर मे लोकप्रिय है । 6.) हिन्दुओं के धार्मिक क्रिया कलापों के लिए और गौड़ीय वैष्णव, वैष्णव के लिए वृन्दावन विश्वभर में प्रसिद्ध है। 7.) पौराणिक मान्यताओं के अनुसार 11 वर्ष की उम्र में वल्लभाचार्य वृंदावन आये थे और उन्होंने भारत में तीन तीर्थस्थानों के प्रचार के साथ साथ नंगे पांव जाकर 84 स्थानों पर भगवद गीता का प्रवचन दिया था । 8.) वृंदावन को वैष्णववाद द्वारा पवित्र माना जाता है। आशा करती हूँ आपको इस लेख से  वृंदावन के रोचक...

भगवान श्री कृष्ण और उनके जीवन का परिचय (PART-2) |

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श्री कृष्णा जी का वृंदावन धाम :- वृंदावन जो की एक ऐतिहासिक शहर है उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है । वृंदावन धाम राधा और कृष्णा जी की जन्मस्थल के लिए जानी जाती है । भगवन श्री कृष्ण ने अपना बालायकल यही बिताया था । ये धाम मथुरा से 10 किलोमीटर की दुरी पर है । और पूरे वर्ष भर यहाँ पर्यटक आते हैं और कृष्ण की बाल लीलाओं और झांकियों को देखने के लिए जन्माष्टमी पर्व पर यहाँ भारी भीड़ जुटती है । ये भी पढ़े | कृष्ण और महाभारत :- हिन्दुओ का एक मुख्य काव्य ग्रन्थ महाभारत है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काव्य के रचनाकार वेदव्यास जी को माना जाता है । यह विश्व का सबसे लम्बा साहित्य ग्रन्थ है । और प्राचीन ग्रन्थ के इतिहास का एक पवित्र ग्रन्थ भगवद्गीता भी है । श्री कृष्ण जी ने अर्जुन जी को उनका सारथि बनकर, कुरुक्षेत्र मे जो उपदेश दिया था वह श्रीमद्भगवदगीता के नाम से आज भी पुर विश्वभर मे परषिद है कृष्ण जी को इस कृति के लिए युगावतार, सर्वश्रेष्ठ पुरुष और जगतगुरु का सम्मान भी दिया गया है। श्री कृष्ण जी ने पांडवो की मदद के साथ साथ विभिन्न आपतियो मे उनकी रक्षा भी की । ये भी पढ़े :- श्री कृष्णा ज...

भगवान श्री कृष्ण और उनके जीवन का परिचय (PART-1) |

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भगवान विष्णु समस्त मनुष्यों को मोक्ष प्रदान करने वाले एक प्रमुख देवता हैं। और हिन्दू धर्म में श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है भगवान विष्णु ने अब तक कई अवतार धारण किये जिनमे से श्रीकृष्ण विष्णु जी के आठवे अवतार माने गए है |जब जब पृथ्वी पर आतंक बड़ा है तभी भगवान विष्णु ने किसी न किसी रूप मे अवतरित होकर पृथ्वी पर राक्षशो का अंत किया और पृथ्वी के भार को कम किया है | भगवान विष्णु जी के सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। जिनमे से भगवान कृष्ण को पूर्णावतार माना गया है । और महाभारत काल मे भी कृष्ण जी ने ही गीता का उपदेश दिया था । भगवन श्री कृष्ण के जीवन के हर एक पढ़ाव मे कई रोचक किस्से हुए इन्हे लीलाधर या लीलाओं का राजा भी कहा जाता है बाल गोपाल की माखन चुराना हो या गोपियों संग रास रचाने हो आदि सभी किस्से बहुत ही रोमांचित थे । भगवान श्री कृष्ण और उनका परिवार (Family of Lord Krishna) पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापरयुग और त्रेता युग के बीच हुआ था और उनकी माता का नाम देवकी और पिता का नाम वासुदेव था। लेकिन उनका पालन पोषण...

भगवन श्री कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन परिचय (PART-2) |

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श्री कृष्ण ओर रुक्मणि का विवाह हुआ द्वारिका मे :- द्वापरयुग मे अमझेरा एक राज्य जो कुंदनपुर नाम से लोकप्रिय था । वह भीष्मक का राज्य हुआ करता था उनके पांच पुत्र ओर एक सूंदर पुत्री थी जिनका नाम रुक्मणि था । रुक्मणि कृष्ण जी को खुद को समर्पित कर चुकी थी लेकिन इस बात से अनजान उनके पिता भीष्मक ने चंदेरी के राजा शिशुपाल से अपनी पुत्री रुक्मणि का विवाह तय कर दिया लेकिन जब उन्हें अपनी सखियों से पता चला की उनका विवाह तय कर दिया गया है तब उन्होंने एक वृद्ध ब्राह्मण के हाथ कृष्ण जो को संदेशा भेजा । रुक्मणि का पत्र मिलते ही वह कुंदनपुर की ओर चल दिए ओर वहाँ से उन्होंने रुक्मणि का अपहरण कर द्वारकापुरी ले गए ओर उनके साथ विधिपूर्वक विवाह किया लेकिन कृष्ण जी का पीछा करते हुए शिशुपाल भी वहाँ पहुंच गए । इसके बाद बलराम ने वीरतापूर्वक अपने युदवंशियो के साथ शिशुपाल ओर उनकी सेना को मार गिराया । श्री कृष्ण का उनकी पटरानियों मे रुक्मणि का मुख्य स्थान था । रुक्मणि के गर्भ से ही प्रद्युमन का जन्म हुआ था जो कामदेव के अवतार माने जाते है ओर आज भी उनकी प्रेम की कई गाथाये मिल जाएगी । ये भी पढ़े :- भगवन श्री कृष्ण का स...

भगवन श्री कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन परिचय (PART-1) A PROPER BIO OF LORD SHRI KRISHNA (PART-1) |

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भगवन श्री कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन परिचय (PART-1)  भगवान श्री कृष्ण के जितने भी नाम लिए जाते है इन सभी नामो के पीछे कहानिया बतायी गयी है इसलिए भगवान श्री कृष्ण के सभी भक्त उन्हें अलग अलग नाम से पुकारते है । जैसे :- कृष्ण, मुरारी, लीलाधर, वासुदेव आदि । श्री कृष्ण जी का जन्म रात १२ बजे हुआ था । इसलिए सभी भक्त उनका जन्मोत्सव रात्रि को १२ बजे ही मनाते है । जन्मष्टमी के अवसर पर हर मंदिर मे कृष्ण जी का जयकारा सुनाई देता है | इस पर्व मे मंदिरो को सजाया जाता है और रात भर मंदिर खुले रहते है । और कई आयोजन भी होते है तो आइये इस लेख मे अब हम कृष्ण जन्मष्टमी के अवसर पर उनके जीवन के सफर और उनकी लीलाओ के बारे मे कुछ अनकहे पहलु बताने जा रहे है :- कृष्ण जी का बालयकाल :- पौराणिक कथाओ के अनुसार वासुदेव का विवाह देवकी से हुआ था और देवकी कंस की बहन थी विवाह के उपरांत जब कंस देवकी को उनके ससुराल छोड़ने जा रहे थे तभी आकषवणी हुई की तेरी मृत्यु देवकी के आठवे संतान से होगी | इसी डर के चलते देवकी और वासुदेव को कारगार मे डाल दिया गया और कंस ने अपनी बहन के सातो संतानो को मार डाला जब आठवीं संतान के रूप मे कृष्ण जी...

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पूजन विधि (Shri Krishna Janmashtami Vrat Puja Vidhi)

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पूजन सामग्री :- भगवान कृष्ण की पूजा सामग्री में एक खीरा, एक चौकी, पीला साफ कपड़ा, बाल कृष्ण की मूर्ति, एक सिंहासन, पंचामृत, गंगाजल, दही, शहद, दूध, दीपक, घी, बाती, धूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन, अक्षत (साबुत चावल), तुलसी का पत्ता, माखन, मिश्री| श्रृंगार सामग्री :- बाल गोपाल के जन्म के बाद उनके श्रृंगार के लिए इत्र, कान्हा के नए पीले वस्त्र, बांसुरी, मोरपंख, गले के लिए वैजयंती माता, सिर के लिए मुकुट, हाथों के लिए कंगन रखें। ऐसे श्रृंगार करें:- भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के बाद उनको आसान पर बैठाकर श्रृंगार करे ! उनके हाथों में कंगन, गले में वैजयंती माला पहनाये, उनके सिर पर मोरपंख लगा हुआ मुकुट पहनाएं, उनकी बांसुरी उनके पास रखे। अब उनको चंदन और अक्षत लगाएं और धुप-दीप से पूजा करे! फिर माखन मिश्री के साथ अन्य भोग की सामग्री के साथ भोग में तुलसी के पत्ते भी अर्पण करें ओर भगवान जी को झूले पर बिठाकर, “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल” गाकर झुला झुलाएं । साथ ही रातभर भगवान की पूजा करनी चाहिए। कृष्ण जन्माष्टमी भोग कैसे बनाये (Krishna Janmashtami Bhog) :- श्री कृष्ण जी के भोग ...

KRISHAN JANAMASHTMI (कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव क्यों मनाया जाता है ?)

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जन्माष्टमी क्या है ? भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव ही जन्माष्टमी है । यह भारत मे ही नहीं बल्कि विदेशो मे बसे भारतीय भी इस पर्व को बहुत धूम धाम से मनाते है । वैसे तो जन्माष्टमी हर एक तीर्थस्थलों मे मनाई जाती है लेकिन मथुरा नगरी मे कान्हा की मनमोह लेने वाली छवि को लोग देखने दूर दूर से देखने आते है। इस दिन मथुरा ही नहीं बल्कि हर स्थल पर भक्ति के रंगो से महक उठता है |और सभी भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं । कृष्ण जी का बाल्य रूप बहुत ही मनमोहक है बाल्यकाल मे उनके अनेको शरारते सुनने को मिल जाएगी । सभी भक्त भगवन को अलग अलग नाम से पुकारते है । कृष्ण जी के हर नाम उनके विभिन्न जीवन शैलियों का प्रतिनिधित्व करते है उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं से कुछ न कुछ नया सिखने को मिलता है । कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव क्यों मनाया जाता है ? भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर कंस का अंत करने के लिए देवकी और वासुदेव के 8 वे बच्चे के रूप मे जन्म लिया था । भगवान श्री कृष्ण गोकुल में बड़े हुए और उन्होंने कंस और कई राक्षसों का वध कर मथुरा लौट आये । तभी से ही जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी भगवान् कृष्ण के जन्मदिन के रूप म...

Corona virus complete information (कोरोना वायरस की पूरी जानकारी)

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कोरोना वायरस का नाम COVID-19 कैसे पड़ा? जैसा की मै आपको पहले ही अपनी पोस्ट में बता चुकी हू की कोरोना क्या है और इसके क्या लक्षण है और क्या सावधानियाँ है तो आइये अब हम जानते है की इस वायरस को COVID-19 नाम डब्ल्यूएचओ ने दिया है तो क्यों ?  डब्ल्यूएचओ के अनुसार COVID-19 कोरोना वायरस डिसीसस (Corona Virus Diseases) में से रखा गया है आइये समझते है इस थ्योरी को.... Corona  को  CO, Virus  को  VI, Diseases  को  D ऐसे COVID नाम रख दिया और 19 से अभिप्राय  ये महामारी वर्ष 2019 से शुरू हुई थी | इसलिए इसका नाम COVID_19 रखा गया | कोरोना वायरस को नोवल कोरोनावायरस नाम कब दिया गया? 2002 में SARS-CoV  और  2012 में MERS-CoV (Middle East Respiratory Syndrome) इन दो वायरस से भी संक्रमण की गंभीर समस्या पैदा हुई थी। ऐसे ही स्थिति अंतिम वर्ष में चीन के वुहान शहर मे देखने को मिली । जब वजह का पता लगाया गया तो जो अंतिम वर्ष में आयी महामारी थी जिसे हम सब कोरोना के नाम से जानते है जिसने अब विकराल रूप ले लिया है...

(What is Corona Virus and its symptoms and precautions) कोरोना वायरस क्या है और इसके लक्षण और सावधानियाँ !

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कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुआ है जो आज दुनिया के लिए एक भयंकर बीमारी का रूप धारण कर चुकी है ! ये सभी जानते है कि  ये वायरस एक ग्लोबल इमरजेंसी बन गया है ! आइये जानते है विस्तार से :-    कोरोना वायरस क्या है ?   कोरोना लैटिन शब्द के लातीनी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ मुकुट से है ! ये वायरस कई संक्रामक जीवों का समूह है कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुआ! ये वायरस बाहरी तरफ उभरे हुए काँटों की तरह दिखाई देने के कारण WHO ने इस वायरस का नाम अंग्रेजी में Covid -19 और वुहान कोरोना वायरस का नाम दिया !  कोरोना वायरस एक प्रकार का श्वसन इन्फेक्शन है जो एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है! ऐसा माना जा रहा है कि ये वायरस चमगादड़ से बनाया गया है जो मानव के जीवन के लिए बहुत ही गंभीर बीमारी का कारण बन गया है ! और चीन से ही पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैला है !   कोरोना वायरस के लक्षण  क्या है ? कोरोना वायरस के लक्षण 2 से 14 दिन तक में दिखाई देने लग जाते है कई बार इस वायरस के लक्षण दिखने के बावजू...

(What is Lockdown ? Why is it applied? What should you do in this situation? complete information) लॉकडाउन क्या है ? ये क्यों लगाया जाता है ? इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए ? पूरी जानकारी :-

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संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहले 21 दिन का और अब 19 दिन का जो लॉकडाउन किया है  देश पर आये कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जारी किया गया है! लॉकडाउन आकस्मिक स्थिति मे लागू किया जाता है जिसमे देश को कोरोना जैसे भीषण रोग से बचाया जा सके और इस स्थिति मे जरुरत की चीज़ों के लिए ही बहार जाने की अनुमति होती है! आइये जानते है विस्तार से :- लॉकडाउन क्या है ?  लॉकडाउन वह दशा है जिसमे लोगो को किसी भीषण रोग से बचाने के लिए देश के लोगो को उनके इलाके मे ही सिमित कर दिया जाता है किसी को भी बहार जाने की इजाजत नहीं होती! लॉकडाउन का मतलब है जो जहा है वही रहे.. अपने घर मे ही रहे ताकि कोई भी भीषण बीमारी कोई बड़ा रूप न ले पाए ! लॉकडाउन पूरी दुनिया मे कभी भी किसी बड़ी महामारी से बचाने के लिए लागू किया जा सकता है ! लोकडाउन क्यों लगाया जाता है ?  लोगो को वायरस या किसी भयंकर बीमारी से बचाने के लिए लोकडाउन लगाया जाता है ! जैसे इस समय पूरा भारतवर्ष ही नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर हिस्से कोरोना वायरस के भयंकर बीमारी से जूझ रहे है ! ऐसे में पूरी दुन...

(Akshaya Tritiya information and importance and history of this festival) अक्षय तृतीया की जानकारी और इस पर्व का महत्व और इतिहास

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अक्षय तृतीया को आखा तीज और अक्षय तीज के नाम से भी जाना जाता है। वैशाख मे इस मुहूर्त को बहुत ही उपयुक्त और महत्पूर्ण माना जाता है। अक्षय तृतीया का ये पर्व शुक्ल पक्ष की वैशाख माह मे तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। जैसे - विवाह और रुके हुए या जरुरी काम आदि। पुराणों के अनुसार इस दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त होता है। अक्षय का तात्पर्य है जो अविनाशी हो यानि जो कभी खत्म नहीं होता ये वह अनूठा पर्व है जिसमे समृद्धि और शुभ फल अनंत होता है!  अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020 को है. इस दिन पूजा का मुहूर्त कुल 6 घंटे 29 मिनट के लिए यानि 05:54 से 12:24 तक का ही है ! अक्षय तृतीया का महत्व :-  अक्षय  का मुहूर्त जो की अप्रैल मे वैशाख मास मे आता है इस पर्व का भी अपना ही एक विशेष महत्व है इस तिथि पर यदि कोई भी शुभ कार्य किया जाये तो उसका विशेष फल मिलता है ! यदि इस दिन कोई शुभ मुहूर्त भी न देखे और विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी करनी हो या वाहन खरीदने आदि जैसे शुभ काम करना हो तो वह इस दिन उत्तम माना जाता है और यदि ये पर्...