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श्री कृष्ण जी के नाम के क्या अर्थ है ? जन्माष्टमी का व्रत का शुभ मुहूर्त और जन्माष्टमी पर खीरे का महत्व, कुछ और अनसुनी गाथाये :-

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श्री कृष्ण जी का अर्थ क्या है?  श्री कृष्णा नाम खुद में ही अलौकिक है। कृष्णा नाम एक संस्कृत शब्द भी है। जिसका अर्थ है सुंदर और आकर्षक।कृष्ण जी नाम का एक और अर्थ है जिसे कृष धातु भी कहा जाता है |जिसका अर्थ है खींचना, हल चलाना, खेती करना आदि।  कृष्ण जी के नाम का एक और अर्थ है जो की है काला और गहरा नीला। कृष्णा शब्द से ही कृषि निकला है जो की सभी प्राणियों के जीवन के आधार बना है। और कृषि को कृषक भी कहा जाता है जो किसान और बैलो दोनों को दर्शाता है। क्या आप जानते है दक्षिणभारत की एक नदी का नाम भी कृष्णा है। श्री कृष्णा निष्कर्म भक्ति के दाता के नाम से भी कई लोग पुकारते है। यहाँ तक की कृष्ण जी को मोक्ष के डाटा भी कहा गया है जो हरी यानि विष्णु जी के रूप में प्रदान करते है।  कृष्' का एक और अर्थ भी है- 'कर्मों का निर्मूलन। इसका अर्थ है की गलत कर्मो का नाश करके भक्ति की राह तक ले जाना। जन्माष्टमी का व्रत और शुभ मुहूर्त :- जैसा कि आप सब जानते है। कि हर साल जन्माष्टमी का व्रत दो दिन रखा जाता है पहले दिन स्‍मार्त समुदाय के लोग यानि ऋषि मुनि समाज के लोग और दूसरे दिन ...

कजरी तीज क्या है कब है क्या महत्व है शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि (पूरी जानकारी)

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कजरी तीज क्या है ? कजरी तीज का व्रत भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है | गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले ही हरितालिका तीज आती है और राखी के दो दिन बाद कजरी तीज | लेकिन इस बार कजरी तीज 25 अगस्त को मनाई जाएगी |  कजरी तीज को किन नमो से जाना जाता है ? इस तीज को बूढ़ी तीज, कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है | कई जगह सुकत का प्रसाद चढ़ाया जाता है इसलिए इस तीज को लोग सातुड़ी तीज के नाम से भी जानते है | कजरी तीज पर धृति योग शुभ योग बनने से सभी कार्य पूर्ण होते है | यह त्योहर मुख्यः रूप से कौन मनाता है और कहा मनाया जाता है ?  ये त्यौहार खासकर महिलाओ का है | कजरी तीज का व्रत भी हिन्दुओ के पर्व करवाचौथ जैसा निर्जला व्रत होता है | जिसमे महिला अपनी पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है | और यह व्रत वो कन्या भी रखती है जिनकी शादी न हो पा रही हो या जिनकी शादी में बाधा आ रही हो |   यह त्यौहार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार सहित बहुत देशो में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है |   इस तीज के व्रत को भी बहुत कठिन माना गया है| ...

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त एवं विधि

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रक्षाबंधन कब है ?  श्रावण मॉस के शुकल पक्ष को सावन पूर्णिमा के दिन यानि आज 22 अगस्त 2021 को रक्षाबंधन का यह पर्व मनाया जायेगा | बहनो को इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है | क्युकी वह अपने भाई के कलाई पर रक्षा धागा बांधती है और वही दूसरी और भाई अपने बहिन की रक्षा का वचन देता है | रक्षाबंधन के इस पर्व की ख़ुशी भाइयो में भी देखने को मिल जाती है | दूर दूर से भाई अपने बहन के यहाँ इस त्यौहार को बड़े ही उल्लास से मनाने आते है | और कुछ न कुछ उपहार जरूर देते है | शुभ मुहूर्त में इस पर्व को करने से जीवन में अच्छे परिणाम देखने को मिलते है|  कब ये पर्व नहीं मनाना चाहिए ? भद्राकाल के मुहूर्त में यह पर्व नहीं मनाना चाहिए | भद्राकाल में दो कार्य ऐसे होते है जिन्हे भूलकर भी नहीं करना चाहिए |  एक तो अभी जो हमने आपको बताया की राखी बांधने का कार्य और दूसरा फाल्गुन मॉस में होलिका दहन का कार्य |  भद्राकाल का समय जान लीजिये :- ये 21अगस्त के शाम 6 बजकर 12 मिनट से अगले दिन यानि 22 अगस्त के सुबह 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा | भद्राकाल के बाद शुभ मुहूर्त कब है ? भद्राकाल के ऊपर बताये गए...

जगन्नाथ जी कौन है उनकी अनोखी यात्रा और जगन्नाथ मंदिर की खासियत और अधूरी क्यों है जग्गनाथ जी की मूर्ति -पूरी कहानी

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कौन है जगन्नाथ जी ?  जगन्नाथ जी भगवान विष्णु जी के अवतार माने जाते है !  जगन्नाथ जी का मंदिर ओड़िशा के प्राचीन शहर पुरी में बना हुआ है | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ जी कृष्ण जी के यानि विष्णु जी के 8 वे अवतार माने गए है | जगन्नाथ जी की अनोखी यात्रा :- प्राचीन मान्यताओ के अनुसार हिन्दुओं के चार तीर्थ स्थल धाम हैं- बद्रीनाथ, द्वारिका, जगन्नाथ और रामेश्‍वरम।  जब भी विष्णु जी चारो धाम की यात्रा के लिए प्रस्थान करते है | तब वह बद्रीनाथ में स्नान करते है जो हिमालय की चोटियों में स्थित है |  गुजरात में बसे द्वारिका धाम में वस्त्र पहनते है | और ओडिशा राज्य के पूरी शहर में भोजन ग्रहण करते है और रामेश्वरम में आराम करते है | भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं हैं क्या कहानी है? आइये जानते है।  मालवा नरेश इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के प्रिय भक्तो में से एक थे। एक दिन मालवा नरेश के सपने में भगवान विष्णु ने दर्शन देकर कहा की समुन्दर तट पर एक लकड़ी का लट्ठा मिलेगा |  उससे तुम्हे मूर्ति बनवानी होगी जैसे ही राजा समुन्दर किनारे गए वहाँ उन्हें एक लकड़ी का लट्ठा...

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, परंपरा, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त |

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हरियाली तीज क्या होती है ? शुकल पक्ष के सावन माह में तीसरे दिन हरियाली तीज मनाई जाती है। इस पर्व को लोग श्रावणी तीज के नाम से भी जानते है ! माना जाता है की इस दिन पार्वती माता अपनी १०० साल की तपस्या के बाद भगवान शिव जी से मिली थी | ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेभगवन के मिलन को इस पर्व से जोड़कर देखा जाता है | हरियाली तीज व्रत 11 अगस्त 2021 को रखा जाएगा। हरियाली तीज कौन मना सकता है ? यह व्रत सुहागन महिलाओ और कुवारी कन्याओ के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है | यह पर्व स्त्रियों का पर्व है | हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है ? इस त्यौहार में स्त्रियाँ निर्जल व्रत करने के साथ अपने हाथो में मेहँदी लगाती है | झूला झूलती है | गाती और नाचती है | ज्यादातर महिलाये इस दिन हरे रंग के कपडे और चूड़िया पहनती है | ऐसा लगता है मानो चारो तरफ हरियाली की चादर सी बिछ गयी हो | पति की लम्बी उम्र, मनचाहा वर प्राप्ति, ख़ुशी और उल्लास का प्रतिक माना जाता है | हरियाली तीज का व्रत क्यों किया जाता है?  इस व्रत को सर्वप्रथम माता पार्वती जी ने भगवान शिव जी के लिए रखा था | ऐसी कारण सभी विवाहित स्त्रिया ...