कजरी तीज क्या है कब है क्या महत्व है शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि (पूरी जानकारी)
कजरी तीज का व्रत भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है | गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले ही हरितालिका तीज आती है और राखी के दो दिन बाद कजरी तीज | लेकिन इस बार कजरी तीज 25 अगस्त को मनाई जाएगी |
कजरी तीज को किन नमो से जाना जाता है ?
इस तीज को बूढ़ी तीज, कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है | कई जगह सुकत का प्रसाद चढ़ाया जाता है इसलिए इस तीज को लोग सातुड़ी तीज के नाम से भी जानते है | कजरी तीज पर धृति योग शुभ योग बनने से सभी कार्य पूर्ण होते है |
यह त्योहर मुख्यः रूप से कौन मनाता है और कहा मनाया जाता है ?
ये त्यौहार खासकर महिलाओ का है | कजरी तीज का व्रत भी हिन्दुओ के पर्व करवाचौथ जैसा निर्जला व्रत होता है | जिसमे महिला अपनी पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है | और यह व्रत वो कन्या भी रखती है जिनकी शादी न हो पा रही हो या जिनकी शादी में बाधा आ रही हो |
यह त्यौहार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार सहित बहुत देशो में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है | इस तीज के व्रत को भी बहुत कठिन माना गया है|
कजरी तीज व्रत 2021 शुभ मुहूर्त :-
प्रारंभ- 24 अगस्त 2021 को शाम 4 बजकर 05 मिनट से 25 अगस्त 2021, शाम 04 बजकर 18 मिनट तक समाप्त |
कजरी तीज व्रत का महत्व :-
कजरी तीज का व्रत अपना महत्व है इस व्रत को करने से दंपति के जीवन की सारी परेशानिया दूर हो जाती है |और विशेष रूप से गाय माता को पूजा जाता है पकवान बनाये जाते है और तो और चंद्रोदय के उदय होने के बाद ही व्रत खोला जाता है |
कजरी तीज क्यों मनाई जाती है ?
कजरी तीज इसलिए भी मनाई जाती है क्युकी लोग कड़ाके को गर्मी ख़तम होने के बाद मानसून का स्वागत करते है |
हरियाली तीज जैसे ही मुख्य तैयारी कजरी तीज के लिए भी की जाती है | क्युकी जो महिला कजरी तीज के व्रत को विधि विधान से करती है उन्हें शिव जी और पार्वती माता के आशीर्वाद के साथ साथ मनोकामना पूरी होने का भी वरदान मिलता है |
कजरी तीज पूजन सामग्री :-
लाल कपड़ा, चौकी, बेलपत्र धतूरे का प्रसाद,भांग,दीपक, जल से भरा हुआ कलश, सेब सूत, केला, सेब, रोली, मौली-अक्षत,नीम की एक डाल, मिट्टी और गोबर, मेंहदी, अगरबत्ती, हल्दी, कुमकुम, मौली, सत्तू, फल, मिठाई, दान के लिए वस्त्र आदि |
कजरी तीज पूजन विधि :-
कजरी तीज पर सुबह स्नान आदि से निवृत होकर शिव जी और पार्वती माता की मूर्ति लाल कपडे पर रखनी चाहिए | और उनका पूजन कर पुरे दिन श्रद्धापुर्वक व्रत रखे |
शाम को व्रत खोलने की विधि :-
सबसे पहले सही दिशा का चुनाव करके दीवार के सहारे मिटटी और गोबर से एक तालाब जैसे छोटा घेरा बना ले |
फिर उसमे कच्चा दूध और जल भरकर किनारे पर नीम की डाली को सीधे रोपते हुए लाल चुनरी उड़ा दे और केला बेलपत्र धतूरे का प्रसाद, भांग , सेब सूत रोली मौली मेहँदी आदि आगे रख दे और फिर दीपक जलाये | और चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से पानी के बाद व्रत खोले |
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