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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Corona virus complete information (कोरोना वायरस की पूरी जानकारी)

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कोरोना वायरस का नाम COVID-19 कैसे पड़ा? जैसा की मै आपको पहले ही अपनी पोस्ट में बता चुकी हू की कोरोना क्या है और इसके क्या लक्षण है और क्या सावधानियाँ है तो आइये अब हम जानते है की इस वायरस को COVID-19 नाम डब्ल्यूएचओ ने दिया है तो क्यों ?  डब्ल्यूएचओ के अनुसार COVID-19 कोरोना वायरस डिसीसस (Corona Virus Diseases) में से रखा गया है आइये समझते है इस थ्योरी को.... Corona  को  CO, Virus  को  VI, Diseases  को  D ऐसे COVID नाम रख दिया और 19 से अभिप्राय  ये महामारी वर्ष 2019 से शुरू हुई थी | इसलिए इसका नाम COVID_19 रखा गया | कोरोना वायरस को नोवल कोरोनावायरस नाम कब दिया गया? 2002 में SARS-CoV  और  2012 में MERS-CoV (Middle East Respiratory Syndrome) इन दो वायरस से भी संक्रमण की गंभीर समस्या पैदा हुई थी। ऐसे ही स्थिति अंतिम वर्ष में चीन के वुहान शहर मे देखने को मिली । जब वजह का पता लगाया गया तो जो अंतिम वर्ष में आयी महामारी थी जिसे हम सब कोरोना के नाम से जानते है जिसने अब विकराल रूप ले लिया है...

(What is Corona Virus and its symptoms and precautions) कोरोना वायरस क्या है और इसके लक्षण और सावधानियाँ !

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कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुआ है जो आज दुनिया के लिए एक भयंकर बीमारी का रूप धारण कर चुकी है ! ये सभी जानते है कि  ये वायरस एक ग्लोबल इमरजेंसी बन गया है ! आइये जानते है विस्तार से :-    कोरोना वायरस क्या है ?   कोरोना लैटिन शब्द के लातीनी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ मुकुट से है ! ये वायरस कई संक्रामक जीवों का समूह है कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुआ! ये वायरस बाहरी तरफ उभरे हुए काँटों की तरह दिखाई देने के कारण WHO ने इस वायरस का नाम अंग्रेजी में Covid -19 और वुहान कोरोना वायरस का नाम दिया !  कोरोना वायरस एक प्रकार का श्वसन इन्फेक्शन है जो एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है! ऐसा माना जा रहा है कि ये वायरस चमगादड़ से बनाया गया है जो मानव के जीवन के लिए बहुत ही गंभीर बीमारी का कारण बन गया है ! और चीन से ही पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैला है !   कोरोना वायरस के लक्षण  क्या है ? कोरोना वायरस के लक्षण 2 से 14 दिन तक में दिखाई देने लग जाते है कई बार इस वायरस के लक्षण दिखने के बावजू...

(What is Lockdown ? Why is it applied? What should you do in this situation? complete information) लॉकडाउन क्या है ? ये क्यों लगाया जाता है ? इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए ? पूरी जानकारी :-

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संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहले 21 दिन का और अब 19 दिन का जो लॉकडाउन किया है  देश पर आये कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जारी किया गया है! लॉकडाउन आकस्मिक स्थिति मे लागू किया जाता है जिसमे देश को कोरोना जैसे भीषण रोग से बचाया जा सके और इस स्थिति मे जरुरत की चीज़ों के लिए ही बहार जाने की अनुमति होती है! आइये जानते है विस्तार से :- लॉकडाउन क्या है ?  लॉकडाउन वह दशा है जिसमे लोगो को किसी भीषण रोग से बचाने के लिए देश के लोगो को उनके इलाके मे ही सिमित कर दिया जाता है किसी को भी बहार जाने की इजाजत नहीं होती! लॉकडाउन का मतलब है जो जहा है वही रहे.. अपने घर मे ही रहे ताकि कोई भी भीषण बीमारी कोई बड़ा रूप न ले पाए ! लॉकडाउन पूरी दुनिया मे कभी भी किसी बड़ी महामारी से बचाने के लिए लागू किया जा सकता है ! लोकडाउन क्यों लगाया जाता है ?  लोगो को वायरस या किसी भयंकर बीमारी से बचाने के लिए लोकडाउन लगाया जाता है ! जैसे इस समय पूरा भारतवर्ष ही नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर हिस्से कोरोना वायरस के भयंकर बीमारी से जूझ रहे है ! ऐसे में पूरी दुन...

(Akshaya Tritiya information and importance and history of this festival) अक्षय तृतीया की जानकारी और इस पर्व का महत्व और इतिहास

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अक्षय तृतीया को आखा तीज और अक्षय तीज के नाम से भी जाना जाता है। वैशाख मे इस मुहूर्त को बहुत ही उपयुक्त और महत्पूर्ण माना जाता है। अक्षय तृतीया का ये पर्व शुक्ल पक्ष की वैशाख माह मे तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। जैसे - विवाह और रुके हुए या जरुरी काम आदि। पुराणों के अनुसार इस दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त होता है। अक्षय का तात्पर्य है जो अविनाशी हो यानि जो कभी खत्म नहीं होता ये वह अनूठा पर्व है जिसमे समृद्धि और शुभ फल अनंत होता है!  अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020 को है. इस दिन पूजा का मुहूर्त कुल 6 घंटे 29 मिनट के लिए यानि 05:54 से 12:24 तक का ही है ! अक्षय तृतीया का महत्व :-  अक्षय  का मुहूर्त जो की अप्रैल मे वैशाख मास मे आता है इस पर्व का भी अपना ही एक विशेष महत्व है इस तिथि पर यदि कोई भी शुभ कार्य किया जाये तो उसका विशेष फल मिलता है ! यदि इस दिन कोई शुभ मुहूर्त भी न देखे और विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी करनी हो या वाहन खरीदने आदि जैसे शुभ काम करना हो तो वह इस दिन उत्तम माना जाता है और यदि ये पर्...

बैसाख पर्व का सभी धर्मो मे अपना इतिहास (Baisakh festival has its own history in all religions)

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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बैसाख त्यौहार बहुत ही पवित्र माना जाता है! इस दिन पुरे भारतवर्ष मे सब धर्मो के अपने अपने त्यौहार होते है जो सभी श्रदालु बहुत हर्षो उल्लास से मनाते है!  इस त्यौहार को मनाने के सभी धर्मो के अपने इतिहास है ! आइये जानते है :-  सिख धर्म का बैसाख पर्व मनाने का इतिहास :-  बादशाह औरंगज़ेब ने गुरु गोबिंद सिंह जी के पिता गुरु तेग बहादुर को मार दिया था उनकी पिता के मौत के बाद गोविन्द सिंग साहब को जब सिखों का गुरु बनाया गया तब उन्होंने "खालसा पंथ" की स्थापना की ताकि जो भी धर्म के विरोधी हो उनका डट कर सामना किया जा सके ! सन 1699 मे गुरु गोबिंद सिंह ने युवाओ को आगे बढ़ने के बहुत प्रोत्साहित किया सभी युवाओ को बार बार समझाया उनके बहुत समझाने पर कुछ युवा आगे आये और उनकी बातो मे रूचि ली ! 13 अप्रैल 1699 को, बहुत से युवाओ मे से पांच युवा को चुना और उन पांचो युवाओ को पंज प्यारे की उपाधि से नवाज़ा गया ! उसी दिन से खालसा पंथ को सिख धर्म के नाम से जाना जाता रहा है और पंज प्यारे की इस प्रथा को एक त्यौहार के रूप मे सिखों मे मनाया जाने लगा ! ...

Importance of Baisakhi (बैसाखी का महत्व)

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बैसाखी का महत्व :- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मुनि भगीरथ की कठोर तपस्या के कारण ही गंगा माता धरती पर उतरी थी ! बैसाखी का यह त्यौहार चैत्र माह मे पड़ता है और ये त्यौहार सिखों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण् और खास त्योहारों मे से एक माना जाता है इसलिए इस त्यौहार पर गंगा स्नान सभी के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है और गंगा माता की स्तुति भी की जाती है ! बैसाख के दिन राशिफल पर सकरात्मक और नकरात्मक दोनों ही प्रभाव पड़ते है! 13 और 14 अप्रैल को ही बैसाखी क्यों मनाई जाती है ? इसे सोर नववर्ष भी कहा जाता है! यह किसानो का पर्व है जिसे देश मे बहुत हर्षो उल्लास के साथ मनाई जाती है! माना जाता है बैसाख के दिन आकाश मे विशाखा नक्षत्र के होने से सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है! जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है ! यह दशा हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को ही घटित होती है अलग अलग देशो मे अलग नामों से प्रचलित है!   बैसाख नाम कैसे रखा गया ? वैशाख माह हर साल 13 या 14 अप्रैल को शुरू होता है!और वैशाख माह का पहला दिन ही बैसाख है! इस वैशाख नाम से ही बैसाख नाम रखा गया और इसे पर्व के रूप...

Why and when is Baisakhi celebrated? (बैसाखी क्यों और कब मनाई जाती है ?)

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बैसाखी कब मनाई जाती है ?  भारत मे यूँ तो हर एक देश के, हर एक धर्म के अपने त्यौहार है लेकिन हर एक त्यौहार अपने अपने धर्म के लोगो के लिए बहुत खास होते है जिसमे से बैसाखी का त्यौहार भी पंजाब और हरियाणा और सिखों के लिए बहुत ही खास है । यह परम्परगत तौर पर हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है । बैसाख क्यों मनाई जाती है ? खेतो मे रबी की फसल पकने से किसान ख़ुशी से झूम उठते है इस ख़ुशी को सभी मिलकर मनाते है भगवन जी का शुक्रिया अदा करते है अच्छी फसल के लिए ! इसलिए इस ख़ुशी के प्रतीक को बैसाख कहा जाता है । माना जाता है 13 अप्रैल 1699 के दिन खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोविन्द सिंह ने की थी । इस त्यौहार की तैयारी बहुत दिन  पहले ही शुरू कर दी जाती है जैसे की दिवाली का त्यौहार । आइये जानते है और विस्तार मे :- 1) लोग घरो की सफाई के साथ साथ, रंगोली और लाइटो से सजाते है। 2) इसी दिन सभी श्रद्धालु स्नान आदि से निवृत होकर गुरूद्वारे मे जाते है और अपनी अरदासें कहते है और गुरु ग्रन्थ का पाठ करते है। 3) अरदास करने के बाद गुरु ग्रन्थ साहिब को प्रसाद का भोग लगाया जाता है और...

हनुमान जयंती कब और कैसे मनाई जाती है, हनुमान जयंती का महत्व | ( When and how is Hanuman Jayanti celebrated and the importance of Hanuman Jayanti )

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हनुमान जी के जन्मदिवस को ही हनुमान जयंती के नाम से जाना जाता है और ये हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है HANUMAN JAYANTI PARV, SHUBH MUHURAT OR PUJA VIDHI (हनुमान जयंती पर्व, शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि ) हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है? भारत मे हर साल हनुमान जी के जन्मदिवस को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरो को आकर्षक फूल मालाओ से सजाया जाता है कई जगह तो शोभयात्री भी आयोजित की जाती है जिसमे लोग बहुत उत्साहित होकर हिस्सा लेते है। और सभी मंदिरो मे विशेष प्रोग्रामो के आयोजन भी किये जाते है इस अवसर पर लाखो भक्तगण इकठ्ठा होकर पूजा आराधना करते है और कार्यकर्मो का आनंद उठाते है और बजरंगबली जी की पूजा, लोगो की उनमे आस्था, उनकी ताकत और ऊर्जा के रूप मे पूजे जाते है। भक्त सुबह नितय कार्यो आदि से निवृत होकर मंदिर जाते है  और लाल सिन्दूर, चोला, लड्डू का प्रशाद चढ़ाते है और मंत्रो का जाप, हनुमान चालीसा  का पाठ करना और मंदिरो की परिकर्मा करना आदि ये सभी रस्मे बहुत करके हनुमान जी से अपनी इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करते है और पूजा होने के बाद सभी भक्तजनो मे प्रशाद ...

HANUMAN JAYANTI PARV, SHUBH MUHURAT OR PUJA VIDHI (हनुमान जयंती पर्व, शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि )

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हिन्दू पर्व में चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है ऐसा माना जाता है इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था पुराणों के अनुसार राम जी की सेवा के लिए अंजना के घर हनुमान जी   ने   भगवान शंकर के ग्यारहवें रुद्र के   रूप   मे   जन्म लिया था । । इस बार हनुमान   जी का जन्मोत्सव अमृतयोग में आज 8 अप्रैल 2020 शुक्रवार को पूजा का विशेष महत्व माना गया है  हनुमान जी के वैसे तो अनेको नाम है लेकिन उन्हें बजरंग बली, मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, शंकर सुवन आदि नामो से पुकारा जाता है जो दुनिया भर मे लोकप्रिय  है। वे हर बाधाओं , परशेनाइयो से मुक्ति दिलवाते है । वे बल बुद्धि और विद्या के देवता भी माने जाते है। आज के दिन मंदिरो को फूलो से सजाया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है । वही कई लोग आज के दिन व्रत भी रखते है । ऐसी अवसर पर   सभी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को शुभकामनाये भी भेजते हैं ऐसा कहा जाता है कि माता जानकी के वरदान के कारण पवनपुत्र हनुमान जी आठ प्रकार की सिद्धयां तथा नौ प्रकार की निधियां...