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दुर्गा पूजा का इतिहास,महत्व और कहानी (Durga Puja 2022)

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  दुर्गा पूजा भारत का धार्मिक त्योहार होने के साथ साथ शक्ति की आराधना का पर्व है। नवरात्रि या दुर्गा पूजा का त्योहार बहुत ही निष्ठां से मनाया जाता है।  दुर्गा पूजा का महत्व।Importance of Durga puja in hindi  माँ दुर्गा पूजा का बहुत ही महत्व हैं इस पर्व को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक कहा जाता हैं। नौ दिनों और नौ रातों के युद्ध के बाद राक्षस पर विजय प्राप्त किया था और दुष्ट रावण पर भगवान राम की जीत हुयी थी इसलिए यह पर्व बहुत ही मह्त्वपूर्ण माना जाता है। ( Durga Puja 2022 ) इन दिनों देवी माँ अपने भक्तो पर विशेष कृपा बरसाती है उनको नकारात्मक ऊर्जा और गलत विचारों को दूर करने, शांतिपूर्ण और आनंदमय जीवन जीने में मदद करती है। और तो और यह पर्व विजयदशमी के रूप में भी मनाया जाता है। साथ ही में दुर्गा पूजा में बुरी शक्तिया भी समाप्त हो जाती है। हर तरफ इस पर्व पर माँ दुर्गा की भक्ति में लोग रंग जाते है। देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है - पंडाल सजते है, गीत गाये जाते है। अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर खाते हैं, लोग नए-नए कपड़े खरीदते हैं, मां दुर्गा के दर्शन करने जाते हैं।  क्या आप जानते...

दुर्गा पूजा से संबंद्धित पूरी जानकारी (Durga Puja 2022)

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दुर्गा पूजा से आप क्या समझते हैं? दुर्गा माता को कई नामो से पुकारा जाता है जिनमे से एक नाम है - नवदुर्गा । चैत्र नवरात्री या दुर्गा पूजा के 10 दिनों का माहौल पूरे देश भर को भक्तिमय बनाये रखता है। बंगाली हिन्दुओ में ये पर्व बहुत ही मह्त्वपूर्ण माना जाता है।  दुर्गा पूजा कब मनाई जाती है और दुर्गा पूजा का पहला पूजा और विसर्जन कब है ? दुर्गा पूजा का यह पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन के महीने में आता है जो कि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानि प्रथम तिथि कहे जाने वाली इस तिथि से इस पर्व की शुरुवात होती है और दशमी तिथि को समाप्त हो जाती है।( Durga Puja 2022 ) इसी दिन राक्षस महिषासुर पर दिव्य दुर्गा देवी ने विजय प्राप्त की थी जिसमे चैत्र नवरात्री का यह पर्व शुरू होता है।  दुर्गा पूजा 26 सितम्बर 2022 को शुरू होकर दशमी के 05 अक्टूबर के दिन विसर्जन से समाप्त होगी और परन्तु जो दुर्गा पूजा 01 अक्टूबर से शुरू होगी वह षष्ठी तिथि से शुरू होगी।  दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती है और दुर्गा पूजा में ऐसा क्या खास है? हिन्दू देवी दुर्गा का यह दुर्गा पूजा पर्व राक्षस महिषासुर पर विजय यानि बुराई पर...

जगन्नाथ जी का शाब्दिक अर्थ क्या है, वह कहाँ के प्रमुख देवता हैं और जगनाथ रथ यात्रा के पीछे की मान्यता औरजगन्नाथ पुरी का क्या महत्व

 जगन्नाथ जी  भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर ओड़िशा राज्य के पुरी शहर में स्थित है। जगनाथ जी के रथ का नाम के रथ का नाम नंदीघोष है कहा जाता है की यह रथ सुनहरे पीले रंग का रथ कृष्ण जी को उपहार के रूप में मिला था जो की भगवान इंद्र के द्वारा दिया गया था। इस रथ को  कपि ध्वज के नाम से भी जाना जाता है। भगवान कृष्ण को पीताम्बर के नाम से भी जाना जाता है। यह पवित्र चार धामों में हिंदुओं के एक धाम में से एक है। जगन्नाथ कौन से भगवान है और जगन्नाथ जी का शाब्दिक अर्थ क्या है? भगवान जगनाथ जी को भगवन विष्णु जी के अवतार श्री कृष्ण जी का रूप है। "ब्रह्मांड के भगवान"  जगन्नाथ जी का शाब्दिक अर्थ है। जगनाथ जी को बौद्ध धर्म,हिन्दू धर्म और बांगलादेश में पूजा जाता है। भगवान जगन्नाथ जी कहाँ के प्रमुख देवता थे? भगवान् जगनाथ जी बलराम और शुभ्रा अपने भाई-बहनों के साथ पुरी मंदिर के प्रमुख देवता माने जाते है।  जगनाथ जी की यात्रा कब निकाली जाती है और कहा यह जगनाथ जी की यात्रा शुरू होती है और यह जगनाथ जी की यात्रा का पर्व कैसे मनाया जाता है ? जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल के आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्व...

भाई दूज से जुड़े कुछ रहस्य और मान्यताये | Unheared Facts & Secrets of Bhaidooj |

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1.) भाई दूज हिंदी के दो शब्दों "भाई" और "दूज" से मिलकर बना है | भाई का अर्थ तो आप सब जानते ही है और दूज का अर्थ है चन्दर्मा के बाद दूसरा दिन |  2.) कार्तिक मॉस के शुकल पक्ष के द्वितीय तिथि को और दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज मनाई जाती है |  3.) भाई दूज के दिन यमदूत की भी पूजा होती है | क्युकी इस दिन भगवान् यम ने अपनी बहन यामी के साथ इस त्यौहार को मनाया था | इसलिए इस दिन को 'यम द्वितीय' या 'यामादविथिया' भी कहा जाता है और संस्कृत में भागिनी हस्ता भोजना के नाम से जाना जाता हैं | 4.) दिवाली के 5 दिन के उत्सव का ये दिन (भाईदूज) अंतिम प्रतिक है |  5.) भाई दूज के दिन ही दीपो के उत्सव का समापन होता है |  6.) दिवाली के 5 दिन के उत्सव में भाईदूज ही ऐसा त्यौहार है जो पुरे भारतवर्ष में मनाया जाता है और गुजरात, गोवा कर्नाटका और महाराष्ट्र में भाऊ-बीज, भाई बीज और पश्चिम बंगाल में भाई फोंटा (फोटा का अर्थ चावल या सिन्दूर का  लेप या काजल का पेस्ट माथे पर तिलक के रूप में लगाना ) और कर्नाटक में इसे सौदरा बिदिगे और मणिपुर के लोग भाई धुज को निंगोल चाकुबा के ना...

गोबर्धन पर्वत से जुड़े कुछ रहस्य और मान्यताये | Unheated facts beleive and auspicious time of Govardhan Parvat |

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आप सभी ये जानते होंगे की मथुरा से करीब 22 किलोमीटर दूर गोबर्धन पर्वत स्थित है | इस पर्वत को कान्हा जी ने ब्रजवासियो की इंद्र देवता से रक्षा करने के लिए उठाया था | लेकिन गोबर्धन पर्वत से जुड़े कुछ रहस्य और मान्यताये है जिनको सुनकर आपको हैरानी होगी | 1.) गोवर्धन पर्वत का आकार दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है, ऐसा माना जाता है कि जब भी गोवर्धन पर्वत समाप्त होगा, उसी समय कलियुग का भी अंत हो जाएगा। 2.) मान्यता के अनुसार गोबर्धन पर्वत की परिक्रमा, हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक लगायी जाती है | 21 किलोमीटर की यह परिकर्मा लगभग 7 कोस की होती है  जिसे सप्तकोसी परिकर्मा भी कहा जाता है | 3.) गोवर्धन पर्वत से थोड़ी दूर हरजी नमक कुंड स्थित है | कहा जाता है की कृष्ण जी अपने सखाओ के साथ इस स्थान पर गायो को चराने आते थे | 4.) हरजी कुंड से थोड़ी ही दुरी पर चूतर टेका स्थान आता है जहा भगवान राम जी, सीता माँ, लक्ष्मण जी  और राधा-कृष्ण का मंदिर स्थित है | 5.) गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के दौरान विट्ठल नामदेव मंदिर और फिर राधा कुंड मंदिर आता है। मान्यता है कि ...

दिवाली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य |

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दिवाली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य   :- 1.) दीपावली दो शब्दों "दिप यानि "दिया" और "अवली" का अर्थ "श्रंखला" या "रेखा" से मिलकर बना है |  2.) जब हिंदुओ में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है तब जैन धर्म के लोग दीवाली के पर्व में जो दीपक जलाते है उसमे वह मोक्ष प्राप्ति की कामना करते है | क्योकि उनके चौबीसवें गुरु महावीर जी को भी मोक्ष की प्राप्ति हुयी थी | 3.) आजकल प्लास्टिक और धातुओं के दिपक बाजार में दिखने लगे है जिसमे कपास की बाती को रखकर उसमे तेल या घी भरा जाता है और इस दिए को दिवाली के दिन जलाया जाता है ताकि पूरी रात दिया जलता रहे और घर रोशन रह सके | 4.) सिखो के यहाँ भी दिवाली मनाई जाती है क्योकि कहा जाता है इसी दिन शाहजहाँ की कैद से सिखो के गुरु हरगोबिंद और 52 राजकुमर और राजकुमारिया मुक्त हुए थे |  5.) दिवाली के त्यौहार पर ही भगवान श्री कृष्णा जी ने दानव नरकासुर को हराया था |  6.) बंगाल और उड़ीसा के लोग भी दिवाली के त्यौहार को काली माता की पूजा अर्चना के रूप में मनाते है |  7.) दिवाली के त्यौहार को १ लख मिलियन से भी अधिक लोग विभिन्न तरी...

दशहरे का अर्थ, महत्व, उद्देशय, जाने रोचक जानकारिया और मान्यताये |

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सभी जानते है की दशहरा नवरात्री समाप्त होने के 10 वे दिन मनाई जाती है |   बुराई को ख़तम करके अच्छाई को बरकार रखने की प्रथा की वजह से दशहरा मनाया जाता है |  दशहरे का अर्थ :- दशहरा का एक अर्थ है दसेरा | दूसरा अर्थ है जो दो शब्दों से बना है दश-जिसका मतलब है -दस और हारा यानि नाश | तीसरे अर्थ के अनुसार दशहरा को दसवीं तिथि भी कहा जाता है |  दशहरा  किन किन नामो से जाना जाता है ? इस दिन भगवान राम जी ने रावण का अंत किया था | और माँ दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षस का अंत किया था |  इसलिए इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम से भी जना जाता है |  दशहरा को आयुध पूजा और बिजोया के नाम से भी जाना जाता है |  दशहरा जिसे आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है | दशहरा का यह त्यौहार आयुध पूजा कर्नाटक, तेलंगाना आंध्र प्रदेश शहरो में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है | दशहरा मनाने का उद्देशय :- दशहरा इसलिए मनाया जाता है क्योकि ये त्यौहार बुराई पर अच्छी की जीत का प्रतिक है | यह त्यौहार अधर्म के रास्ते को छोड़ धर्म के रस्ते पर चलते रहने का पाठ सिखाता है | और धर्म के प्रति निष्ठ...