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दिवाली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य |

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दिवाली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य   :- 1.) दीपावली दो शब्दों "दिप यानि "दिया" और "अवली" का अर्थ "श्रंखला" या "रेखा" से मिलकर बना है |  2.) जब हिंदुओ में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है तब जैन धर्म के लोग दीवाली के पर्व में जो दीपक जलाते है उसमे वह मोक्ष प्राप्ति की कामना करते है | क्योकि उनके चौबीसवें गुरु महावीर जी को भी मोक्ष की प्राप्ति हुयी थी | 3.) आजकल प्लास्टिक और धातुओं के दिपक बाजार में दिखने लगे है जिसमे कपास की बाती को रखकर उसमे तेल या घी भरा जाता है और इस दिए को दिवाली के दिन जलाया जाता है ताकि पूरी रात दिया जलता रहे और घर रोशन रह सके | 4.) सिखो के यहाँ भी दिवाली मनाई जाती है क्योकि कहा जाता है इसी दिन शाहजहाँ की कैद से सिखो के गुरु हरगोबिंद और 52 राजकुमर और राजकुमारिया मुक्त हुए थे |  5.) दिवाली के त्यौहार पर ही भगवान श्री कृष्णा जी ने दानव नरकासुर को हराया था |  6.) बंगाल और उड़ीसा के लोग भी दिवाली के त्यौहार को काली माता की पूजा अर्चना के रूप में मनाते है |  7.) दिवाली के त्यौहार को १ लख मिलियन से भी अधिक लोग विभिन्न तरी...

दशहरे का अर्थ, महत्व, उद्देशय, जाने रोचक जानकारिया और मान्यताये |

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सभी जानते है की दशहरा नवरात्री समाप्त होने के 10 वे दिन मनाई जाती है |   बुराई को ख़तम करके अच्छाई को बरकार रखने की प्रथा की वजह से दशहरा मनाया जाता है |  दशहरे का अर्थ :- दशहरा का एक अर्थ है दसेरा | दूसरा अर्थ है जो दो शब्दों से बना है दश-जिसका मतलब है -दस और हारा यानि नाश | तीसरे अर्थ के अनुसार दशहरा को दसवीं तिथि भी कहा जाता है |  दशहरा  किन किन नामो से जाना जाता है ? इस दिन भगवान राम जी ने रावण का अंत किया था | और माँ दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षस का अंत किया था |  इसलिए इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम से भी जना जाता है |  दशहरा को आयुध पूजा और बिजोया के नाम से भी जाना जाता है |  दशहरा जिसे आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है | दशहरा का यह त्यौहार आयुध पूजा कर्नाटक, तेलंगाना आंध्र प्रदेश शहरो में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है | दशहरा मनाने का उद्देशय :- दशहरा इसलिए मनाया जाता है क्योकि ये त्यौहार बुराई पर अच्छी की जीत का प्रतिक है | यह त्यौहार अधर्म के रास्ते को छोड़ धर्म के रस्ते पर चलते रहने का पाठ सिखाता है | और धर्म के प्रति निष्ठ...

मां सिद्धिदात्री के नौवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता सिद्धिदात्री के नौवें स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :- दुर्गा माँ का नौवा रूप :- सिद्धिदात्री माँ :-  माँ दुर्गा का नौवा स्वरूप माँ सिद्धिदात्री है |  माँ सिद्धिदात्री की सवारी सिंह है |  माँ की चार भुजाये है | उनके नीचे के बाये हाथ में कमल का फूल और ऊपर के बाये हाथ में शंख है | ऐसे ही माँ के निचले दाये हाथ में गदा और ऊपर के दाये हाथ में चक्र है |  माँ सिद्धिदात्री की पहचान माँ की मंद मुस्कान भी है | माँ सिद्धिदात्री जी की जो भी उपासना करता है उन्हें नियमो का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए | माँ के उपासक की इछाये पूरी हो जाती है | कोई भी इच्छा फिर बाकि नहीं रह जाती |   वैसे तो माँ सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने लिए कई सिद्धियों का पालन कर पूजा अर्चना की जाती है जो की बहुत कठोर है | माँ की इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आदि सभी है ||   लेकिन यदि को कोई माँ सिद्धिदात्री भक्त ऐसा कठोर तप न कर पाए तो माँ की पूजा अर्चना करने से भी माँ को प्रसन्न करना भी श...

मां महागौरी के आठवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता महागौरी के आठवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :- दुर्गा माँ का आठवा रूप :- महागौरी माँ :-  माँ दुर्गा के आठवा स्वरूप माँ महागौरी है | जिन्हे सब भक्तगण ऐश्वर्या को देवी भी कहते है | माँ का वर्ण गौर है |  माँ महागौरी के वस्त्र और आभूषण आदि सभी सफ़ेद है | माँ का वाहन वृषभ है |  माँ महागौरी की चार भुजाये है | माँ के दाये हाथ में त्रिशूल और बाये हाथ में डमरू है | और माँ एक हाथ अभय मुद्रा में और दूसरा हाथ वर मुद्रा में है |  यदि कोई भी भक्त माँ महागौरी की पूजा अर्चना करता है उसको सारे संकटो से मुक्ति तो मिलती ही है और असंभव कार्य पूरे हो जाते है | और माँ महागौरी की शरण में जो भी भक्त जाता है |  उसे  माँ दुर्गा के नो रूपों का आशीर्वाद भी मिल जाता है | भगवत पुराण के अनुसार माँ के सभी नो रूप और सारी महाविद्या माँ आदिशक्ति के ही अंश में निहित है |  माँ पार्वती जगभर में माँ महागौरी के नाम से प्रसिद्व है | और माँ महागौरी आदिशक्ति (अर्धांगिनी) के रूप में शिव जी के साथ हमेशा विरजमान है |   इस द...

मां कालरात्रि के सातवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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  माता कालरात्रि के सातवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :-  दुर्गा माँ का सातवाँ रूप :- कात्यायिनी माँ :- मां कालरात्रि माँ दुर्गा और माँ पार्वती का सातवाँ स्वरूप है | भक्त का मन इस दिन  सहस्रार' चक्र में प्रवेश करता है |  माँ का रूप विनाशकारी स्वरूपों में से कालरात्रि एक अनोखा स्वरूप माना गया है |  माँ का ये विनाशकारी रूप भूत -प्रेत आदि और नकरात्मक ऊर्जा को विनाश करने में तत्पर है | भक्त के लिए समस्त सिद्धियों का भंडार खुल जाता है |  माँ कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है | और इनके हाथ में तलवार है और बाईं तरफ के ऊपर के हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे के हाथ में खड्ग (कटार) है। माँ कालरात्रि के दर्शन मात्र से ही ज्ञान के भंडार तो मिलते ही है, शक्ति भी मिलती है और तो और गरीब व्यक्ति भी धनवान बन जाता है | मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है  | माँ पार्वती ने माँ कालरात्रि का स्वरूप इसलिए धारण किया क्युकी असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करना था |   इस स्वरूप के दर्शन से सभी पापो का नाश होता ह...

मां कात्यायनी के छठे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता कात्यायिनी  के छठे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी  :-  दुर्गा माँ का छठा रूप :- कात्यायिनी माँ :- -माँ कात्यायिनी पार्वती माँ का छठा रूप है | माँ कात्यायिनी भगवन के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुयी | जिन्होंने महिषासुर जैसे राक्षश का अंत किया |देवी दुर्गा का रूप होने के कारण माँ कात्यायिनी को भी लाल रंग बहुत प्रिय है |  इस दिन भक्त का मन "आज्ञा चक्र" में प्रवेश होता है जो की बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है |  आज्ञा चक्र का अपना ही महत्वपूर्ण स्थान इसलिए है क्युकी इस दिन भक्त खुद को माँ को समर्पित कर देता है और जो माँ को खुद को समर्पित करता है | उसी को माँ के साक्षात् दर्शन मिल पाते है | माँ कात्यायनी भक्तो को माँ का ध्यान गोधूलि बेला में ध्यान करना चाहिए | माँ ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है |   माँ कात्यायनी  का वाहन सिंह है | और माँ की कात्यायनी की चार भुजाये है | एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में पुष्प है |   माँ कात्यायनी का रूप बहुत ही अलौकिक है |  यह भी पढ़े  :- नवर...

मां स्कंदमाता के पाँचवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता  स्कंदमाता के पाँचवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी  :- दुर्गा माँ का  पाँचवा  रूप :-  स्कंदमाता  माँ :- नवरात्री में पाँचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है | माँ स्कंदमाता भक्तो के लिए मोक्ष का द्वार खोलती है |  माँ कमल पर विराजमान है | माँ का वाहन सिंह है और माँ स्कंदमाता की चार भुजाये है |  माँ स्कंदमाता की दाहिने हाथ में कमल का पुष्प है और बहिना हाथ जो की ऊपर उठा हुआ है वो वरमुद्रा में है | और माँ स्कंदमाता के गोद में माँ के प्रिय सुपुत्र कार्तिकेय बैठे हुए है |  मां स्कंदमाता का जो भी पूजा अर्चना करता है वह सब मोह माया से मुक़्त होकर माँ स्कंदमाता के स्वरुप को पूजा करने में पूरी तरह ध्यानमग्न हो जाता है | इस दिन उपासक का मन विशुद्ध' चक्र में प्रवेश करता है | माँ स्कंदमाता को जो भी विशेषकर पूजता है | उन्हें सावधानी बरतते हुए साधना के मार्ग में अग्रसर होना चाहिए और जो ऐसा करता है उसकी सारी इछाये पूर्ति होने के साथ साथ सुख, समृद्धि और शांति का भी अनुभव होता है |  माँ का यह र...

मां कुष्मांडा के चौथे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता  कुष्मांडा के चौथे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी  :- दुर्गा माँ का  चौथा रूप :-  कुष्मांडा  माँ :- नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा के स्वरुप को उपासना में भक्तो का मन अनाहत' चक्र में प्रवेश करता है |  माँ कुष्मांडा के सात भुजाओ में अश्त्र शश्त्र - कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा विभूषित है | और आठवीं भुजा में सभी सिद्धियों की माला शुशोभित है |  माँ कुष्मांडा का वाहन सिंह है | ये रूप पार्वती माता का ही आदिशक्ति रूप है |  माँ कुष्मांडा में ही ऐसी शक्तिया है जो सूर्यमण्डल लोक में निवास करती है | और इनका तेज सभी दिशाओ में फैला हुआ है |  माँ कुष्मांडा की जो भी भक्ति करता है उन्हें यश और बल की प्राप्ति तो होती ही है | साथ ही में हर रोग से छुटकारा मिलता जाता है |  जो भी भक्त सच्चे हृदय से माँ को पुकारता है या उनकी पूजा अर्चना करता है उन्हें  मोक्ष की प्राप्ति होती है | और माँ सभी को भवसागर से पार करवाती है |  माँ सभी भक्तो को सुख समृद्धि तो प्रदान करती ही है | साथ ही ...

माता चंद्रघंटा के तीसरे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता  चंद्रघंटा  के  तीसरे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी  :- दुर्गा माँ का  तीसरा रूप :- चंद्रघंटा माँ :- नवरात्री में माँ के तीसरे स्वरुप चंद्रघंटा शक्ति की पूजा अर्चना की जाती है | इस दिन भक्त मणिपूर' चक्र में प्रवेश होता है |  माँ का स्वरूप बहुत ही शांतिमय है | और सभी भक्तो क्क कल्याण करती है |  अब माँ चंद्रघंटा का अर्थ जान लेते है | माँ के सिर यानि मस्तक ूपर जो अर्धचंद बना हुआ है इसलिए माँ का नाम चंद्रघंटा रखा गया |  माँ चंद्रघंटा का वाहन सिंह है | यानि जो भी माँ चंद्रघंटा की उपासना करते है वो हमेशा शौर्यवान (बलवान) और किसी से न डरने वाले होते है |  माँ के दस हाथ और स्वर्ण जैसा शरीर का रंग है यानि चमकीला | माँ के दसो हाथ कर-कमल गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, खप्पर, चक्र और अस्त्र-शस्त्र विभूषित है | यदि आप माँ के रूप को देखे तो ये हमेशा युद्ध के लिए तैयार हुयी खड़ी योद्धा की तरह प्रतीत होती है | माँ के अलौकिक रूप सुख, शांति और समृद्धि का भाव है |  यदि कोई भक्त दुखी है और माँ चंद्रघंटा के शरण में जाता...

माता ब्रह्मचारिणी के दूसरे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता ब्रह्मचारिणी के  दूसरे  स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :- दुर्गा माँ का  दूसरा  रूप :- ब्रह्मचारिणी माँ :- नवरात्रि में माँ के दूसरा स्वरूप, माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है | जो की असीम, अलौकिक और अनंत है |  ब्रह्मचारिणी का अर्थ है | ब्रह्मचर्य पालनकर्ता या फिर दूसरे शब्दों में बताये तो ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है - आचरण करने वाली यानि तप का आचरण करने वाली माँ ब्रह्मचारिणी |  वैसे तो माँ को बहुत नामो से जाना जाता है लेकिन तपश्चारिणी नाम से माँ ब्रह्मचारिणी के नाम को कथित किया गया है | पौराणिक मान्यता के अनुसार जो माँ के दूसरे स्वरूप की पूजा करते हैं उन्हें हमेशा उज्जवलता और ऐश्वर्य का सुख मिलता हैं। पुराणों की मान्यता के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल शुशोभित है| दूसरे दिन भक्तो का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में युक्त होता है |  माँ का श्रृंगार हमेशा कमल के फूलो से होता है | और सर पर मुकुट के आलावा कोई श्रृंगार नहीं होता |  इस दिन आप उन कन्याओ को पूजा जाता है | जिनक...

माता शैलपुत्री के पहले स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

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माता शैलपुत्री के पहले स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :- दुर्गा माँ का पहला रूप :- शैलपुत्री माँ :- माँ दुर्गा को आदि शक्ति के रूप में भी जानी जाती है | लेकिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप को सती के रूप से जाना जाता है | जब भी नवरात्री प्रारम्भ होती है तो माँ के पहले स्वरुप शैलपुत्री माँ की ही पूजा आराधना की जाती है | माँ शैलपुत्री का जन्म पर्वतो के राजा हिमालय के यहाँ हुआ था और इनका जन्म पत्थर या शैल से हुआ माना जाता है | इसलिए ही माँ नाम शैलपुत्री रखा गया |  माँ शैलपुत्री के दाये हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल शुशोभित है |  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चौतरा नवरात्री को बासंतिक नवरात्रि (Basantik Navratri) भी कहा जाता है।  शैलपुत्री माता का विवाह पहले ही पारवती माता के रूप में शिव जी से हो चूका था। काशी नगर के वाराणसी शहर में माता शैलपुत्री का जन्म मन जाता है।  माँ शैलपुत्री के मस्तक पर अर्धचंद्र, वृष पर सवार रहने वाली, शूलधारिणी और यशस्विनी है।  नवरात्रि के पहले दिन से लेकर अंतिम नवे दिन तक हर रोज घर में उनका पूजन क...