मां सिद्धिदात्री के नौवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-


माता सिद्धिदात्री के नौवें स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी :-

दुर्गा माँ का नौवा रूप :- सिद्धिदात्री माँ :-

 माँ दुर्गा का नौवा स्वरूप माँ सिद्धिदात्री है | 

माँ सिद्धिदात्री की सवारी सिंह है |  माँ की चार भुजाये है | उनके नीचे के बाये हाथ में कमल का फूल और ऊपर के बाये हाथ में शंख है | ऐसे ही माँ के निचले दाये हाथ में गदा और ऊपर के दाये हाथ में चक्र है | 

माँ सिद्धिदात्री की पहचान माँ की मंद मुस्कान भी है |

माँ सिद्धिदात्री जी की जो भी उपासना करता है उन्हें नियमो का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए | माँ के उपासक की इछाये पूरी हो जाती है | कोई भी इच्छा फिर बाकि नहीं रह जाती |  

वैसे तो माँ सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने लिए कई सिद्धियों का पालन कर पूजा अर्चना की जाती है जो की बहुत कठोर है | माँ की इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आदि सभी है ||  

लेकिन यदि को कोई माँ सिद्धिदात्री भक्त ऐसा कठोर तप न कर पाए तो माँ की पूजा अर्चना करने से भी माँ को प्रसन्न करना भी शुभ फलदायी माना जाता है | 


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माँ सिद्धिदात्री के पूजन का शुभ समय :-

13 अक्टूबर दिन बुधवार की रात 08:07 बजे से 14 अक्टूबर दिन गुरुवार शाम 06:52 बजे समापन हो रहा है। ऐसे में इस वर्ष महानवमी का व्रत 14 अक्टूबर को रखा जाएगा |

नवमी के दिन रवि योग प्रात: 9:36 बजे से प्रारंभ होकर 15 अक्टूबर को सुबह 06:22 बजे तक है। और नवमी को राहुकाल दोपहर 01:33 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक है। राहुकाल में पूजा का करना शुभ नहीं माना जाता ।

माँ सिद्धिदात्री का नाम कैसे रखा गया और पौराणिक कथा :-


पौराणिक कथा के अनुसार माँ सिद्धिदात्री की भगवन शिव ने कठोर तपस्या कर प्रसन्न किया और सीढिया प्राप्त की |

इन सिद्धियों से शिव का आधा शरीर देवी माँ का हो गया | इस प्रकार महादेव अर्धनारीश्वर कहलाये | 

शास्त्रों के अनुसार देवताओ ने राक्षसो के हिंसा से परेशान होकर शिव जी और विष्णु जी को आग्रह किया | 
और  वह उपस्थित सभी देवताओ के तेज से माँ का एक और आदिशक्ति रूप उत्पन्न हुआ जो की सिद्धिदात्री के नाम से प्रसिद हुआ |


माँ सिद्धिदात्री की पूजन विधि सामग्री :- 

आसान, गंगाजल, नौ फूल (कमल का फूल हो सके तो ) जो ककी लाल वस्त्र में लपेटे हुए हो, माँ का श्रीनगर का सामान, ९ सिन्दूर की डिब्बी, नो तरह के खाद्य प्रदार्थ, पूरी सब्जी, उपहार |

माँ सिद्धिदात्री की पूजन विधि सामग्री :- 

1.) सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत होकर पूरी सब्जी , काले चने, हलवा आदि बनाये |

2.) अब मंदिर में आसान पर बैठकर माँ सिद्धिदात्री की मूर्ति या तस्वीर एक चौकी पर विराजमान करे | 

3.) अब माँ को गंगाजल से स्नान करवाए | 

4.) अब माँ को धुप द्वीप करे और नौ फूल (कमल का फूल हो सके तो ) जो की लाल वस्त्र में लपेटे हुए हो, माँ का श्रीनगर का सामान, ९ सिन्दूर की डिब्बी, नो तरह के खाद्य प्रदार्थ, पूरी सब्जी, ९ कन्याओ को जीमने के लिए कुछ उपहार पहले माँ को अर्पण करे और प्राथना करे की हमारी प्रार्थना स्वीकार कर लीजिये | 

5.) माँ की आरती कर अब ९कन्याओ को बुलाये और पहले कन्याओ के पैर छुए और अब उनको पूरी सब्जी काले चने हलवा और अपनी क्षमता अनुसार कुछ उपहार दे उन्हें जिमाये | और जब कन्याये जिम ले तो उनका दुबारा आशीर्वाद लेकर उन्हें आदर के साथ विदा करे | 

6.) तब प्रसाद खाये और फिर स्वयं भोजन करे |

माँ सिद्धिदात्री का पसंदीदा भोग :-

 फल, काला चना, पूरी, खीर, नारियल और हलवा आधी सभी पसंद है |

मान्यताये :-

1.) माँ को सभी सिद्धियों देने वाला माना गया है | 

2.) माँ सिद्धिदात्री ही की जो भी भक्त उपासना करता है वह मोह माया के बंधन से मुकत होकर मोक्ष को प्राप्त होता है | 



आशा करती हूँ आपको इस लेख से माता सिद्धिदात्री के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

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