हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, परंपरा, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त |



हरियाली तीज क्या होती है ?

शुकल पक्ष के सावन माह में तीसरे दिन हरियाली तीज मनाई जाती है। इस पर्व को लोग श्रावणी तीज के नाम से भी जानते है ! माना जाता है की इस दिन पार्वती माता अपनी १०० साल की तपस्या के बाद भगवान शिव जी से मिली थी | ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेभगवन के मिलन को इस पर्व से जोड़कर देखा जाता है |

हरियाली तीज व्रत 11 अगस्त 2021 को रखा जाएगा।

हरियाली तीज कौन मना सकता है ?

यह व्रत सुहागन महिलाओ और कुवारी कन्याओ के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है | यह पर्व स्त्रियों का पर्व है |

हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है ?

इस त्यौहार में स्त्रियाँ निर्जल व्रत करने के साथ अपने हाथो में मेहँदी लगाती है | झूला झूलती है | गाती और नाचती है | ज्यादातर महिलाये इस दिन हरे रंग के कपडे और चूड़िया पहनती है | ऐसा लगता है मानो चारो तरफ हरियाली की चादर सी बिछ गयी हो | पति की लम्बी उम्र, मनचाहा वर प्राप्ति, ख़ुशी और उल्लास का प्रतिक माना जाता है |

हरियाली तीज का व्रत क्यों किया जाता है? 

इस व्रत को सर्वप्रथम माता पार्वती जी ने भगवान शिव जी के लिए रखा था | ऐसी कारण सभी विवाहित स्त्रिया अपने अखंड सुहाग के लिए और अविवाहिता अपने मन मुताबिक वर के लिए यह व्रत रखती है | इस दिन गोरी शंकर जी का पूजन विधि विधान अनुसार किया जाता है | और पार्वती माता जी को सुहाग का सब सामान चढ़ाया जाता है |

हरियाली तीज की परंपरा | 

1.) तीज की परंपरा के अनुसार शादीशुदा लड़की अपने पीहर एक दो दिन पहले ही चली जाती है या फिर लड़की को पीहर बुलाया जाता है |

2.) पहली तीज पर नवविविहत लड़कियों के ससुराल से कपड़े, श्रृंगार का समान, मेहंदी, गहने और मिठाई मायके में भेजी जाती है | 

3.) तीज का व्रत रखने वाली स्त्रियाँ अपनी सास के पैर छूती है और सास से आशीर्वाद लेकर उन्हें सुहाग का सब सामान देती है | यदि सास न हो तो किसी भी बड़ी जेठानी या बुजुर्ग महिला को सुहागी दे सकती है | 

4.) आज ये परंपरा सिर्फ स्त्रियों तक ही सीमित नहीं रह गयी है बल्कि पुरुष भी माँ की प्रतिमाओं की झाकियाँ निकलते है और बड़े हर्षो उल्लास से झूमते नाचते और गाते है |

हरियाली तीज पूजा मुहूर्त:-

तीज की शुरुआत 10 अगस्त को शाम 6 बजकर 5 मिनट से हो जाएगी और इसकी समाप्ति 11 अगस्त को शाम 4 बजकर 53 मिनट पर होगी।

हरियाली तीज की पूजा विधि :- 

1.) तीज का व्रत रखने वाली स्त्रियाँ या कुवारी कन्या को सुबह जल्दी उठ घर की साफ़ सफाई कर, स्नान आदि से निवृत होकर संभव हो तो हरे रंग के कपडे पहनने चाहिए | 
2.) फिर मंडप को तोरण आदि से सजाना चाहिए | 

3.) मंदिर के सामने चौकी रखकर शिवलिंग माता पार्वती गणेश जी कार्तिक जी सभी की मूर्तिया मिट्टी से बनानी चाहिए और सादे पानी की जगह मिटटी में गंगाजल का प्रयोग करे |

4.)  देवताओं का आह्वान करते हुए उनकी विधि विधान अनुसार पूजन करें।

5.) -इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती के गीत गाती हैं और कथा सुनती हैं।

6.) इस दिन पूजन के समय सारी स्त्रियाँ किसी बगीचे या मंदिर में इकठा होकर माँ की प्रतिमा का श्रृंगार करती है | और अर्धगोला बनाकर माँ की प्रतिमा की पूजा कर कथा सुनती है और पति की दीर्घ आयु की मनोकामना पूरी होने की कामना करती है |

7.)  कई जगह ऐसी मान्यता है की माँ के पूजन के बाद स्त्रियाँ लाल मिटटी से नहान करना शुद्ध मानती है |

हरियाली तीज का महत्व :- 

यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी को अर्पित किया जाता है | महिलाये माता पारवती का पूजन अपने अखंड सुहाग और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती है | पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने शिव जी को अपने पति के रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिए थे | उनके इस कठोर तपस्या को देखकर भोले नाथ ने माता पार्वती को 108 वे जन्म  में अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था | जो भी इस दिन सच्चे मन से पार्वती माता की पूजा करता है उनके पतियों को दीर्घ आयु प्रदान करती है |

आशा करती हूँ आपको इस लेख से हरियाली तीज के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

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