जगन्नाथ जी कौन है उनकी अनोखी यात्रा और जगन्नाथ मंदिर की खासियत और अधूरी क्यों है जग्गनाथ जी की मूर्ति -पूरी कहानी



कौन है जगन्नाथ जी ? 

जगन्नाथ जी भगवान विष्णु जी के अवतार माने जाते है !  जगन्नाथ जी का मंदिर ओड़िशा के प्राचीन शहर पुरी में बना हुआ है | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ जी कृष्ण जी के यानि विष्णु जी के 8 वे अवतार माने गए है |


जगन्नाथ जी की अनोखी यात्रा :-

प्राचीन मान्यताओ के अनुसार हिन्दुओं के चार तीर्थ स्थल धाम हैं- बद्रीनाथ, द्वारिका, जगन्नाथ और रामेश्‍वरम। 

जब भी विष्णु जी चारो धाम की यात्रा के लिए प्रस्थान करते है | तब वह बद्रीनाथ में स्नान करते है जो हिमालय की चोटियों में स्थित है |

 गुजरात में बसे द्वारिका धाम में वस्त्र पहनते है | और ओडिशा राज्य के पूरी शहर में भोजन ग्रहण करते है और रामेश्वरम में आराम करते है |

भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं हैं क्या कहानी है? आइये जानते है। 

मालवा नरेश इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के प्रिय भक्तो में से एक थे। एक दिन मालवा नरेश के सपने में भगवान विष्णु ने दर्शन देकर कहा की समुन्दर तट पर एक लकड़ी का लट्ठा मिलेगा | 

उससे तुम्हे मूर्ति बनवानी होगी जैसे ही राजा समुन्दर किनारे गए वहाँ उन्हें एक लकड़ी का लट्ठा मिला लेकिन उनके मन में अब एक प्रश्न उठा की मूर्ति कैसे या किससे बनवायी जाये ? 

तभी भगवान विष्णु स्वयं श्री विश्वकर्मा के साथ एक वृद्ध मूर्तिकार के रुप में प्रकट होकर आये और कहा की वो ये मूर्ति बना देंगे लेकिन उनकी शर्त थी की वो ये मूर्ति किसी एकांत जगह में बनाएंगे। 

जहा सिर्फ वे होंगे और उन्हें कोई परेशान न करे। और अगर उन्हें किसी ने परेशान किया तो वे तभी मूर्ति बीच में छोड़कर चले जायेंगे। राजा ने उनकी शर्त मानते हुए उन्हें एक एकांत कमरा दे दिया और बहार से बंद कर दिया। 

 किसी न किसी काम से राजा मूर्तिकार के कमरे के आसपास जरूर आते लेकिन एक दिन जब कमरे से कोई आवाज नहीं आयी तो उन्होंने सोचा की काम खत्म हो गया होगा। 

अपनी इसी जिज्ञासा के कारण जैसे ही उन्होंने कमरा खोलकर देखा तो मूर्तिकार तुरंत बहार आ गए और उन्होंने कहा की मूर्ति पूरी नहीं हुयी है।

 राजा ने अपने किये पर बहुत माफ़ी भी मांगी लेकिन मूर्तिकार विश्कर्मा ये कहकर वहाँ से चले गए की ये भगवान जी की ही मर्ज़ी है। इसलिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्तियां आज भी उसी अवस्था में जगन्नाथ मंदिर में स्थापित हैं।

जगन्नाथ मंदिर की खासियत क्या है?

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत मंदिर के ऊपर का सुदर्शन चक्र और ध्वज है। पूरी में आप कही भी चले जाये ये चक्र आपको हर जगह से दिखाई जरूर देगा और ध्वज भगवन जगनाथ जी के इस धरती पर होने का एहसास दिलाता है। 

शिखर पर लगा हुआ ध्वज भी हमेशा उल्टी दिशा में उड़ता है। जगन्नाथ मंदिर की एक और विशेषता है। कि यहाँ कोई भी पक्षी आपको बैठा हुआ नहीं दिखाई देगा और तो और इस मंदिर के ऊपर विमान को भी उड़ने कि इज़ाज़त नहीं है क्योकि ये क्षेत्र नो जॉन घोषित किया हुआ है। 

इस मंदिर में बनाया गया सामान्य मात्रा में प्रशाद कभी भक्तो के लिए कम नहीं पड़ता। चाहे भक्तो कि संख्या कितनी ही अधिक क्यों न हो जाये। लेकिन भगवन के कपट बंद होते ही प्रशाद भी खत्म हो जाता है। 
यह मंदिर 4,00,000 वर्ग फुट में बना हुआ है।


आशा करती हूँ आपको इस लेख से जगन्नाथ जी और जगन्नाथ मंदिर के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

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