Importance of Baisakhi (बैसाखी का महत्व)
बैसाखी का महत्व :-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मुनि भगीरथ की कठोर तपस्या के कारण ही गंगा माता धरती पर उतरी थी ! बैसाखी का यह त्यौहार चैत्र माह मे पड़ता है और ये त्यौहार सिखों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण् और खास त्योहारों मे से एक माना जाता है इसलिए इस त्यौहार पर गंगा स्नान सभी के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है और गंगा माता की स्तुति भी की जाती है ! बैसाख के दिन राशिफल पर सकरात्मक और नकरात्मक दोनों ही प्रभाव पड़ते है!
13 और 14 अप्रैल को ही बैसाखी क्यों मनाई जाती है ?
इसे सोर नववर्ष भी कहा जाता है! यह किसानो का पर्व है जिसे देश मे बहुत हर्षो उल्लास के साथ मनाई जाती है! माना जाता है बैसाख के दिन आकाश मे विशाखा नक्षत्र के होने से सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है! जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है ! यह दशा हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को ही घटित होती है अलग अलग देशो मे अलग नामों से प्रचलित है!
बैसाख नाम कैसे रखा गया ?
वैशाख माह हर साल 13 या 14 अप्रैल को शुरू होता है!और वैशाख माह का पहला दिन ही बैसाख है! इस वैशाख नाम से ही बैसाख नाम रखा गया और इसे पर्व के रूप मे मनाने की प्रथा प्रचलित हो गयी! इस दिन पूर्णिमा होने के कारण भी ये महीना बैसाख कहा गया है!
बैसाखी स्वर्ण मंदिर में कैसे मनाई जाती है :-
क्या ऐसा संभव है कि बैसाखी के पर्व का जिक्र हो और अमृतसर मे स्थित स्वर्ण मंदिर का नाम ना आये। वैसे तो स्वर्ण मंदिर की अपनी ही महिमा है मंदिर का नज़ारा और रौनक बहुत ही आकर्षक है यहाँ करोड़ो श्रदालु आते है लेकिन बैसाख मे कई गुना भीड़ उमड़ती है और सभी श्रदालु दर्शन कर है और मंदिर की रौनक और सजावट का आनंद उठाते है और लंगर का प्रसाद का भोग लेते है|
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मुनि भगीरथ की कठोर तपस्या के कारण ही गंगा माता धरती पर उतरी थी ! बैसाखी का यह त्यौहार चैत्र माह मे पड़ता है और ये त्यौहार सिखों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण् और खास त्योहारों मे से एक माना जाता है इसलिए इस त्यौहार पर गंगा स्नान सभी के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है और गंगा माता की स्तुति भी की जाती है ! बैसाख के दिन राशिफल पर सकरात्मक और नकरात्मक दोनों ही प्रभाव पड़ते है!
13 और 14 अप्रैल को ही बैसाखी क्यों मनाई जाती है ?
इसे सोर नववर्ष भी कहा जाता है! यह किसानो का पर्व है जिसे देश मे बहुत हर्षो उल्लास के साथ मनाई जाती है! माना जाता है बैसाख के दिन आकाश मे विशाखा नक्षत्र के होने से सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है! जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है ! यह दशा हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को ही घटित होती है अलग अलग देशो मे अलग नामों से प्रचलित है!
बैसाख नाम कैसे रखा गया ?
वैशाख माह हर साल 13 या 14 अप्रैल को शुरू होता है!और वैशाख माह का पहला दिन ही बैसाख है! इस वैशाख नाम से ही बैसाख नाम रखा गया और इसे पर्व के रूप मे मनाने की प्रथा प्रचलित हो गयी! इस दिन पूर्णिमा होने के कारण भी ये महीना बैसाख कहा गया है!
बैसाखी स्वर्ण मंदिर में कैसे मनाई जाती है :-
क्या ऐसा संभव है कि बैसाखी के पर्व का जिक्र हो और अमृतसर मे स्थित स्वर्ण मंदिर का नाम ना आये। वैसे तो स्वर्ण मंदिर की अपनी ही महिमा है मंदिर का नज़ारा और रौनक बहुत ही आकर्षक है यहाँ करोड़ो श्रदालु आते है लेकिन बैसाख मे कई गुना भीड़ उमड़ती है और सभी श्रदालु दर्शन कर है और मंदिर की रौनक और सजावट का आनंद उठाते है और लंगर का प्रसाद का भोग लेते है|
बैसाखी के अलग धर्मो मे अलग नाम :-
असम मे बिहू, बंगाल मे पोइला बैसाख, तमिलनाडु मे पुथांडू, केरल मे पूरन विशु, बिहार व केरल मे सत्तू संक्रांति आदि इन अलग-अलग नामो से हर राज्य मे बैसाख मनाई जाती है !
आशा करती हूँ आपको इस लेख से बैसाखी का महत्व के इस पवन अवसर में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |
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Importance of Baisakhi: -
According to religious believes, due to the harsh penance of Muni Bhagirath on this day, Mother Ganga descended on the earth. This festival of Baisakhi falls in the month of Chaitra and this festival is considered to be one of the most important and special festivals for the Sikhs, hence bathing the Ganges on this festival is considered very sacred for all and the Ganga Mata is also praised. The horoscope on Baisakh has both positive and negative effects on it.
Why is Baisakhi celebrated on 13 and 14 April?
It is also called Tire New Year! This is the festival of farmers, which is celebrated with great enthusiasm in the country. It is believed that on the day of Baisakh, due to the presence of Visakha Nakshatra in the sky, the Sun enters Aries. Also known as Aries Sankranti. This condition occurs every year on 13 or 14 April, in different countries, May is popular with different names.
How was Baisakh named?
Baishakh month starts on 13th or 14th April every year and Baisakh is the first day of Vaishakh month. The name Baisakh was named after this Vaishakh name. The practice of celebrating Baisakh as a festival became popular. Due to the full moon on this day, this month has been called Baisakh.
How Baisakhi is celebrated in the Golden Temple: -
Is it possible that the festival of Baisakhi is mentioned and the name of the Golden Temple in Amritsar is not mentioned. Well, the Golden Temple has its own glory. The view and the beauty of the temple is very attractive. Crores of devotees come here, but in Baisakh manifold crowds and all the devotees visit and enjoy the beauty and decoration of the temple and enjoy the offerings of the langar.
Baisakhi has different names in different religions: -
Bihu in Assam, Poila Baisakh in Bengal, Puthandu in Tamil Nadu, Puran Vishu in Kerala, Sattu Sankranti in Bihar and Kerala etc. Baisakh is celebrated in every state with different names.
Hope you have learned a lot from this article in this wind opportunity of the festival of Baisakhi. If you find this article useful, then share it on social media. So that anyone else can get this information because of you.
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