KRISHAN JANAMASHTMI (कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव क्यों मनाया जाता है ?)



जन्माष्टमी क्या है ?

भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव ही जन्माष्टमी है । यह भारत मे ही नहीं बल्कि विदेशो मे बसे भारतीय भी इस पर्व को बहुत धूम धाम से मनाते है ।

वैसे तो जन्माष्टमी हर एक तीर्थस्थलों मे मनाई जाती है लेकिन मथुरा नगरी मे कान्हा की मनमोह लेने वाली छवि को लोग देखने दूर दूर से देखने आते है। इस दिन मथुरा ही नहीं बल्कि हर स्थल पर भक्ति के रंगो से महक उठता है |और सभी भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं । कृष्ण जी का बाल्य रूप बहुत ही मनमोहक है बाल्यकाल मे उनके अनेको शरारते सुनने को मिल जाएगी ।

सभी भक्त भगवन को अलग अलग नाम से पुकारते है । कृष्ण जी के हर नाम उनके विभिन्न जीवन शैलियों का प्रतिनिधित्व करते है उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं से कुछ न कुछ नया सिखने को मिलता है ।

कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव क्यों मनाया जाता है ?

भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर कंस का अंत करने के लिए देवकी और वासुदेव के 8 वे बच्चे के रूप मे जन्म लिया था ।

भगवान श्री कृष्ण गोकुल में बड़े हुए और उन्होंने कंस और कई राक्षसों का वध कर मथुरा लौट आये । तभी से ही जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी भगवान् कृष्ण के जन्मदिन के रूप मनाया जाता हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी महत्व :-

जन्माष्टमी का अपना ही अलग महत्व है इस दिन अगर कोई भी स्त्री पुरुष व्रत रखते है तो कई व्रतों का फल एक ही दिन व्रत रखने से मिल जाता है । और अगर इस दिन बल गोपाल को पलने मे झुलाया जाये तो उन सबकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती है ।

श्री कृष्ण पूजन करने से दीर्घायु, संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है |इसलिए जन्माष्टमी को एकता का प्रतीक भी माना जाता है । इस एकता के लिए भी यह पर्व मनाया जाता है ।

कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव :-

जन्माष्टमी पर्व के मध्यरात्रि 12 बजे बाल गोपाल को स्नान करवाया जाता है सूंदर -2 कपडे और आभूषण पहनाये जाते है । और उनको पालने मे रखते है और बाल गोपाल के साथ साथ सभी देवताओ को मिठाइयों की भेट चढ़ाई जाती है ।

कृष्ण की झाकियों को आयोजन किया जाता है । मंदिरो को सजाया जाता है । इस परंपरा को बहुत ही उत्साह और ख़ुशी के साथ मानते हुए रास लीलाओ का प्रदर्शन आयोजित करते है और भक्त रात भर जग कर कृष्ण भजनो पर नृत्य करते है ।

जन्माष्टमी पकवान :-

श्री कृष्ण जी के जन्मोत्सव और उनके आगमन पर विभिन्न मीठे व्यंजन बनाये जाते है । इस सभी व्यंजनों को भगवन को भोग लगाया जाता है क्युकी उनको माखन, दही आदि सभी पसंदीदा भोजन माना जाता है । और बाद मे सब मे प्रशाद को परिवार मे बाँट दिया जाता है ।

कृष्ण जन्माष्टमी 2020 मुहूर्त :-

इस साल जन्माष्टमी पर्व 11/12 अगस्त 2020 शनिवार को मनाया जाएगा।

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ समय (मुहूर्त) 11/12 अगस्त को है

आशा करती हूँ आपको इस लेख से कृष्णा जन्माष्टमी के त्यौहार के बारे में बहुत कुछ जान गए होंगे । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जगन्नाथ जी का शाब्दिक अर्थ क्या है, वह कहाँ के प्रमुख देवता हैं और जगनाथ रथ यात्रा के पीछे की मान्यता औरजगन्नाथ पुरी का क्या महत्व

मां महागौरी के आठवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, परंपरा, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त |