गणेश जी के बारे में कुछ मह्त्वपूर्ण जानकारी,अनसुने अवतार और मान्यताएँ
गणेश जी का परिवार :-
गणेश जी भगवान शिव जी और पार्वती माता के पुत्र है |
इनके बड़े भाई श्री कार्तिकेय और बहनें मनसा देवी, अशोका सुंदरी है | इनकी दो पत्नियाँ है जिनके नाम रिद्धि और सिद्धि है इन्ही से इनके दो पुत्र और एक पुत्री है जिनके नाम "शुभ और "लाभ और पुत्री का नाम संतोषी (संतोषी माँ) है |
गणेश जी के बारे में हिन्दू धर्म के अनुसार मान्यताएँ :-
हिन्दू धर्म के अनुसार हर एक कार्य में सर्वप्रथम पूज्य गणेश जी है | उनके ध्यान के बगैर कोई भी काम शुरू नहीं करना चाहिए | बुदवार यानि (वेडनेसडे) गणेश जी का दिन माना जाता है | इनका एकमात्र ध्यान व् पूजन करने से ही सारे कष्ट दूर हो जाते है |
गणेश जी विशव के हर एक कण में विराजमान है | मध्याह्न के समय भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था | उनके चारों हाथों में पाश, अंकुश, मोदकपात्र तथा वरमुद्रा धारण हैं। और उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प अच्छे अच्छे लगते है | पुराणों के अनुसार सिंह, मयूर और मूषक गणेश जी के वाहन है।
गणेश जी के पूजन में अगर संभव हो सके तो प्रशाद में मोदक और बेसन के लड्डू का ही भोग लगाना चाहिए | गणपति जी का नाम त्रिग्वेद और यजुर्वेद दोनों पुराणों में उल्लेखित है |
गणेश जी के नाम का अर्थ :-
गणेश जी = गण + ईश= गणों के ईश
गणपति जी - गण + पति = गणो की स्वामी
गणेश जी के नाम :-
वैसे तो गणेश जी के बहुत नाम है लेकिन कई भक्त गणेश जी को गणपति के नाम से भी जानते है तो आइये जानते है उनके कुछ और नाम :-
१. बालगणपति
२. बुद्धिनाथ
४ एकाक्षर
६. एकदन्त
७. गजानन
१०. गजव
१२. गणाध्यानकक्ष
१४. गौरीसुत
१५. लम्बकर्ण
१६. लम्बोदर
१७. महाबल
१८. महागणपति
१९. महेश्वर
२०. मंगलमूर्ति
२१. मूषकवाहन
२२. निधिश्वरम
२३. प्रथमेश्वर
२४. शूपकर्ण
२५. शुभम
२६. सिद्धिदाता
२७. सिद्दिविनायक
२८. सुरेश्वरम
२९. वक्रतुण्ड
३१. अलम्पता
३२. अमित
३३. अनन्तचिदरुपम
३४. अवनीश
३५. अविघ्न
३७. भूपति
३८. भुवनपति
३९. बुद्धिप्रिय
४०. बुद्धिविधाता
४१. चतुर्भुज
४२. देवादेव
४३. देवांतकनाशकारी
४४. देवव्रत
४८. द्वैमातुर
४९. एकदंष्
गणेश जी की शरीर की रुपरेखा का अर्थ :-
गणेश जी के ऊपरी भाग ब्रह्माण्ड कहलाता है और उनकी चारो भुजाये चारो दिशाओ के लिए सर्वत्र यानि विश्वव्यापी है |
गणेश जी की लम्बी नाक यानि सूंड प्रतिभाशाली का प्रतीक है | चन्द्रबिन्दु लड्डू और उनकी आँखें सूक्ष्म दृष्टि (तेज नजर वाले) है | इनका मस्तक हाथी का और नाक महाबुद्धित्व का प्रतिक है और वे लंबोदर इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि समस्त सृस्टि उनके उदर में विचरती है।
शिव और पार्वती के पुत्र गणेश जी के अनंत नाम और अनगिनत स्वरूप हैं, परन्तु इनके कुछ अवतार ऐसे है जिनके बारे में आप शायद ही जानते है |
तो आइये जानते है इनके कुछ अवतारों के बारे में |
इन अवतारों के बारे में मुद्गल पुराण में लिखा है | इस पुराण में अनेको अवतार है और इन सभी अवतारों के अपने अलग अलग महत्व है |
1.) गणेश जी ने वक्रतुण्ड के रूप में मत्सरासुर के अभिमान का नाश किया था |
2.) लमबोदर के रूप में क्रोधासुर का सर्वनाश किया था |
३.) जब गणेश जी महोदर के अवतार में थे तब उन्होंने मोहासुर के घमंड का नाश किया था |
4.) गजनान का अवतार एक सांख्य अवतार माना गया है | जिस स्वरूप में भगवन गणेश जी ने लोभासुर के अहंकार का अंत किया था |
5.) एकदन्त के रूप में गणेश जी ने मदासुर नामक राक्षस का संहार किया था |
6.) गणेश जी के विकट स्वरुप ने कामासुर का अंत किया था |
7.) विष्णु के स्वरूप विघ्नराज, जो की गणेश जी के एक और अवतार है इन्होने ममतासुर के गर्व को समाप्त किया था |
8.) शिव जी के स्वरूप धूम्रवर्ण, जो की गणेश जी का एक और रूप है | इन्होने अहंतासुर का अंत किया था |
आशा करती हूँ आपको इस लेख से गणेश जी के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

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