विनायक चतुर्थी के शुभ योग, 10 सितंबर 2021 पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री & विधि और मंत्र |

शुकल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और कृष्ण  पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। चतुर्थी तिथि हर महीने दो पक्ष में आती है। जैसा की हमने आपको ऊपर बताया है |  विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को यह तिथिया समर्पित है।
 
हिन्दू धर्म के अनुसार सर्वप्रथम गणेश जी को पूजन और व्रत करने वालो को अपार सफलता, हर प्रकार की सुख समृद्धि मिलना और हर काम बिना किसी संकट या बाधा के पूरा हो जाता है |

विनायक चतुर्थी कब और शुभ योग :- 

 विनायक चतुर्थी  कृष्ण पक्ष की आषाढ़ मास में और भाद्रपद की शुकल चतुर्थी को मनाई जाती है जो की इस बार जुलाई महीने में यानि 13 जुलाई 2021 मंगलवार को मनाई गयी थी और 10 सितंबर 2021 मनाई जाएगी  |कृष्ण पक्ष की आषाढ़ मास में दो शुभ योग बन रहे थे जो की रवि और सिद्धि थे| दोनों योग में किया गया व्रत और पूजन बहुत ही शुभ योग माना जाता है | और भाद्रपद की शुकल चतुर्थी मध्याह्न के समय मनाई जाएगी। 

विनायक चतुर्थी का मुहूर्त :- 

चतुर्थी तिथि का शुभ आरम्भ 13 जुलाई 2021 मंगलवार सुबह 08:24 बजे से हो रहा है | दोपहर में 11:04 बजे से दोपहर 01:50 बजे के बीच गणपति जी की पूजा का मुहूर्त है | रवि योग, प्रात: 05:32 बजे से अगले दिन प्रात: 03:41 बजे तक और सिद्धि योग दोपहर 02:49 बजे तक रहेगा |

माना जाता है की इन दोनों योगो में जो भी पूजा अर्चना करता है या फिर कोई भी शुभ कार्य करता है वह जरूर सफल होता है |

और 10 सितंबर 2021 का गणेश पूजन के लिए मुहूर्त : 11:03 से 13:32 तक
जब चन्द्र दर्शन नहीं करना है : 09:11:59 से 20:52:59 तक

विनायक चतुर्थी की पूजा सामग्री :- 

पंचामृत, लाल गुड़हल का फूल, चंदन का पेस्ट, मोदक या लड्डू, दूर्वा घास, कुमकुम, अगरबत्ती और धूप और देसी घी की ज्योत आदि गणेश जी को अर्पित किया जाता है।

विनायक चतुर्थी की पूजन विधि :-

आज के दिन गणेश जी की पूरी विधि विधान से पूजन करना चाहिए | 

1.) स्नान आदि से निवृत होकर साफ़ कपडे पहनकर मन्दिर की सफाई जरूर करे |

2.)  गणेश जी को गंगा जल से जलाभिषेक करवाकर लाल शुद्ध कपडे पर विराजमान करे | 

3.) गणेश जी पर सिन्दूर चढ़ाएं |

4.) गणेश जी की पूजा अर्चना करने से पूर्व पूजन थाली को सजाये और सब पूजन सामग्री भगवान जी को अपर्ण करे |

5.) गणेश जी का मंत्र. "ॐ गं गणपतयै नम:" बोल 21 दूर्वा चढ़ाएं। लड्डू और मोदक का भोग लगाए |  

6.) 21 या 11 लड्डुओं को भोग लगाने के बाद 5 लड्डू ब्राह्मणो को या मंदिर में जरूर दे और तत्पश्चात सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दे और बाकि प्रसाद के लड्डू सभी में बाँट दे |

7.) शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, गणेश स्तुति, गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा,  संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणेश पुराण आदि कर सकते है  श्री गणेश की आरती कर 'ॐ गणेशाय नम:' मंत्र की 1 माला जपें। 

8.)वैसे तो हर शाम पूजा जरूर करनी चाहिए | लेकिन आज के समय को देखते हुए जो बिजी है या किसी वजह से शाम को पूजा न कर पाए/पाता हो | इस दिन शाम को पूजा करने से भी गणेश जी आपके संकट दूर करते है |.

आशा करती हूँ आपको इस लेख से विनायक चतुर्थी के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली होगी । यदि आपको ये लेख उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि आपकी वजह से और किसी को भी यह जानकारी मिल पाए |

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जगन्नाथ जी का शाब्दिक अर्थ क्या है, वह कहाँ के प्रमुख देवता हैं और जगनाथ रथ यात्रा के पीछे की मान्यता औरजगन्नाथ पुरी का क्या महत्व

मां महागौरी के आठवे स्वरूप के बारे में पूरी जानकारी, पूजन विधि और सामग्री, शुभ मुहूर्त,भोग प्रसाद और पौराणिक कथा :-

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, परंपरा, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त |